व्यापार
एक घंटा पहले
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विचारों
सफलता की एक प्रेरणादायक कहानी
झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली 62 वर्षीय नर्मदा ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से व्यवसाय की दुनिया में एक अलग मुकाम हासिल किया है। आज उनका नमकीन का ब्रांड ‘रियान’ न केवल लोकप्रिय है, बल्कि सालाना 20 लाख रुपये का शानदार टर्नओवर भी हासिल कर रहा है। नर्मदा ने अपने पोते के नाम पर इस ब्रांड की नींव रखी थी। पिछले 15 वर्षों से वह इस कार्य में जुटी हुई हैं और आज उनकी पहुंच 10 से अधिक राज्यों तक हो चुकी है। वह पूरे भारत में अपने उत्पाद ऑनलाइन माध्यमों से भेजती हैं। उनके पास नमकीन की 90 अलग-अलग किस्में हैं और वह 20 तरह के विभिन्न पापड़ भी बनाती हैं।
शुरुआत का सफर: छोटे से बड़े की ओर
नर्मदा बताती हैं कि अक्सर लोग रातों-रात बड़ा ब्रांड बनाने के सपने देखने लगते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि व्यवसाय हमेशा छोटे स्तर से ही शुरू करना चाहिए। उन्होंने खुद इसका उदाहरण पेश किया है। उनके पास 90 प्रकार की नमकीन है, जिसमें से केवल मसाला मखाना की ही 20 से ज्यादा वैरायटी शामिल हैं। उन्होंने सबसे पहले बहुत कम मात्रा में नमकीन तैयार की। केवल 5 पैकेट बनाकर उन्होंने सबसे पहले ब्रांडिंग की बारीकियों को समझा और यह देखा कि पैकिंग को किस तरह से और आकर्षक बनाया जा सकता है।
घर-घर जाकर उत्पादों की मार्केटिंग
उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि क्या लोगों को उनका स्वाद पसंद आएगा। उन्होंने पहले अपने रिश्तेदारों को नमकीन चखाया और फिर घर-घर जाकर अपने उत्पादों का प्रचार किया। धीरे-धीरे उन्होंने 40 से 50 तरह की वैरायटी दिखाना शुरू किया। कई बार लोग मौके पर ही उनके नमकीन खरीद लेते थे और स्वाद अच्छा लगने पर दोबारा ऑर्डर देते थे। मेलों में स्टॉल लगाना भी उनके लिए मार्केटिंग का एक जरिया बना, जहाँ उन्होंने लोगों के लिए सैंपल रखे ताकि ग्राहक चख सकें और फिर उत्पाद का चुनाव कर सकें।
धैर्य और निरंतरता का महत्व
नर्मदा का मानना है कि कोई भी व्यापार एक ही दिन में खड़ा नहीं होता है। उनका कहना है कि किसी भी काम को कम से कम 5 साल पूरे मन से देने की जरूरत होती है। मुनाफा कमाने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने पहले महीने बिजनेस शुरू किया था, तब उनकी कमाई महज 500 रुपये थी। आज के दौर में लोग पहले ही दिन से बड़ी कमाई की उम्मीद करने लगते हैं, जो गलत है। व्यापार में समय के साथ धीरे-धीरे जब लोग आपके स्वाद के अभ्यस्त हो जाते हैं, तभी असली सफलता और निरंतर ऑर्डर मिलने की शुरुआत होती है।
बाजार में प्रतिस्पर्धा और अपनी पहचान
बाजार में हल्दीराम जैसे बड़े नाम पहले से ही मौजूद हैं, ऐसे में नई शुरुआत करने वालों के लिए प्रतिस्पर्धा कठिन होती है। नर्मदा का कहना है कि अगर हम वही चीज बनाएंगे जो पहले से बाजार में उपलब्ध है, तो ग्राहक हमारे पास क्यों आएंगे। इसीलिए उन्होंने अपने उत्पादों में कुछ यूनिक फ्लेवर जोड़ने पर जोर दिया। उनका प्याज वाला मखाना और क्रीम फ्लेवर का मखाना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। ऐसी खास वैरायटी उन्हें कहीं और नहीं मिलती। उनकी लोकप्रियता का आलम यह है कि उनके पास ये आइटम अक्सर स्टॉक से बाहर हो जाते हैं और सिर्फ इसी आइटम से वह हर महीने 10,000 रुपये से अधिक की बिक्री कर लेती हैं।
सोशल मीडिया की ताकत
आज के समय में तकनीक का लाभ उठाते हुए नर्मदा ने इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप का भरपूर इस्तेमाल किया है। उन्होंने अपने ब्रांड के लिए सोशल मीडिया पर पेज बनाए और शॉर्ट वीडियो पोस्ट करना शुरू किया। इस मुफ्त मार्केटिंग के जरिए उनके उत्पाद उत्तर से दक्षिण भारत तक पहुंच गए हैं। इसके अलावा, पैकिंग के दौरान वह हर पैकेट के साथ एक छोटा सा स्पेशल नोट जरूर रखती हैं, जिससे ग्राहक को यह अहसास होता है कि उनके ऑर्डर की सराहना की जा रही है। छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने और ग्राहकों के साथ जुड़ाव बनाने के कारण ही आज उनका व्यवसाय पूरे भारत में फल-फूल रहा है।
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