झारखंड
4 दिन पहले
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विचारों
झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाले शंभू पाठक नाम के एक पुजारी इन दिनों चर्चा में हैं। वह एक मंदिर में सुबह से रात तक पूजा-अर्चना का काम करते हैं। उनकी उम्र भले ही 77 वर्ष हो चुकी हो, लेकिन उन्हें देखकर कोई भी यही कहेगा कि वह महज 55 साल के हैं। हैरानी की बात यह है कि न तो उन्हें कोई बीमारी है और न ही उन्हें आंखों पर चश्मा लगाने की जरूरत पड़ी है।
सादा दिनचर्या और संतुलित आहार
शंभू पाठक बताते हैं कि उनकी पूरी दिनचर्या बेहद साधारण है। वह सुबह 3:30 बजे उठ जाते हैं और सबसे पहले एक घंटे टहलते हैं। इसके बाद नहा-धोकर पूजा-पाठ करते हैं और मंदिर के लिए निकल जाते हैं। सुबह के समय वह सिर्फ एक गिलास सत्तू पीते हैं और घर से निकल पड़ते हैं।
उनके अनुसार, सुबह सत्तू पीकर निकलने के बाद उन्हें दोपहर 2 बजे ही भोजन नसीब होता है और वह भोजन भी घर से बांधकर लाया हुआ होता है, बाहर का नहीं। दोपहर में वह दो रोटी खाते हैं और रात में भी सिर्फ दो रोटी ही खाते हैं। सुबह वह नाश्ता नहीं करते।
घर का बना भोजन ही पसंद
शंभू पाठक का कहना है कि उन्होंने जीवन में कभी बाहर का खाना नहीं खाया। उन्होंने बताया, "मैंने आज तक जिंदगी में कभी भी बाहर का खाना नहीं खाया है। पार्टी में भी नहीं जाता। सिर्फ प्रभु की सेवा में दिन-रात लगा रहता हूं, सुबह 6:00 बजे मंदिर आ जाता हूं और शाम 6:00 बजे घर जाता हूं।" इन 12 घंटों के दौरान वह सिर्फ दो रोटी ही खाते हैं, इसके अलावा कुछ नहीं।
पहाड़ की चढ़ाई बनी कसरत
उनका मंदिर पहाड़ पर स्थित है, इसलिए सुबह-शाम वह कम से कम 4 से 5 बार पहाड़ पर ऊपर-नीचे आते-जाते हैं। उनके मुताबिक, इसी से उनकी कसरत भी हो जाती है और चलना-फिरना भी। यही वजह है कि उन्हें न घुटनों में कोई परेशानी है, न बीपी की शिकायत और न ही शुगर की।
वह बताते हैं कि रात में घर पहुंचने के बाद 8:00 बजे दो रोटी खाते हैं और साथ में एक गिलास दूध लेते हैं। उनके अनुसार बस यही उनका पूरा आहार है।
40 साल से एक ही डाइट
शंभू पाठक खुद को शुद्ध शाकाहारी बताते हैं और नॉनवेज को हाथ तक नहीं लगाते। उनका कहना है कि पुजारी होने के नाते और घर में गाय होने की वजह से वह उसी का दूध-दही लेते हैं। वह पिछले 40 साल से एक ही डाइट का पालन कर रहे हैं। उनका मानना है कि यही कारण है कि आज तक उन्हें कभी अस्पताल का मुंह नहीं देखना पड़ा।
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