झारखंड की सियासत में घमासान, राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और राजद के बीच आर-पार की जंग झारखंड 2 महीने पहले 51
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की हार के बाद महागठबंधन में तकरार बढ़ गई है। कांग्रेस ने सहयोगियों पर भितरघात का आरोप लगाया है, जबकि राजद ने गठबंधन से कांग्रेस को बाहर करने की मांग कर दी है।

राज्यसभा चुनाव ने बढ़ाई महागठबंधन की मुश्किलें

झारखंड में राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने सत्तारूढ़ महागठबंधन की एकजुटता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। उच्च सदन की दूसरी सीट के लिए हुए मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की हार के बाद अब गठबंधन के भीतर आपसी भरोसे का संकट गहरा गया है। चुनाव के इस लिटमस टेस्ट में कांग्रेस ने राष्ट्रीय जनता दल और माले पर क्रॉस वोटिंग और धोखेबाजी का आरोप लगाया है। वहीं, राजद ने पलटवार करते हुए कांग्रेस को ही इस हार के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

राजद का तीखा प्रहार, गठबंधन से बाहर करने की मांग

राजद विधायक दल के नेता सुरेश पासवान ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि कांग्रेस को गठबंधन से तत्काल बाहर का रास्ता दिखाया जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस गठबंधन धर्म निभाने में पूरी तरह विफल रही है और अब उन्हें साथ लेकर चलना संभव नहीं है। राजद के राष्ट्रीय महासचिव भोला प्रसाद यादव ने भी कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी अंदरूनी कलह छिपाने के लिए सहयोगियों को निशाना बना रही है।

कांग्रेस का दर्द, अपनों पर ही भितरघात का आरोप

झारखंड कांग्रेस के राजेश ठाकुर ने इस हार पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी इस धोखे को चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेगी। उनके अनुसार, भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी की जीत से ज्यादा दर्द इस बात का है कि गठबंधन के भीतर मौजूद सहयोगियों ने ही परदे के पीछे से खेल किया है। कांग्रेस ने अब इन चेहरों को आलाकमान के सामने बेनकाब करने की चेतावनी दी है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने बड़ी चुनौती

इस सियासी खींचतान के बीच सरकार के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर टिकी हैं कि वे इस बिखराव को कैसे संभालते हैं। हालात ये हैं कि:

  • जेडीयू विधायक सरयू राय ने जेएमएम, राजद और माले के 41 विधायकों के साथ कांग्रेस मुक्त सरकार चलाने का सुझाव दिया है।
  • कांग्रेस सरकार से मंत्रियों को हटाने की मांग पर अड़ी हुई है।

अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री गठबंधन के इस टूटते हुए ढांचे को किस तरह बचाते हैं और सत्ता का समीकरण कैसे सुलझाते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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