पटना की प्रिया का कमाल, पुरानी साड़ियों को देती हैं ऐसा मेकओवर कि शोरूम जैसी चमक उठती हैं साड़ियां बिहार एक घंटा पहले 2
पटना की प्रिया रंजन पुरानी और अलमारी में पड़ी साड़ियों को पेंटिंग और डाई के जरिए नया जीवन दे रही हैं, जिससे महिलाएं उन्हें दोबारा फैशन के साथ पहन पा रही हैं।

पुरानी यादों को नया फैशन बना रही हैं प्रिया

अक्सर घरों में महिलाओं की अलमारी में ऐसी कई साड़ियां होती हैं जिन्हें वे सालों से दोबारा नहीं पहनती हैं। ये साड़ियां समय के साथ नीचे दब जाती हैं और फैशन के बदलने के कारण पुरानी दिखने लगती हैं। हालांकि, इन कपड़ों से महिलाओं का गहरा भावनात्मक लगाव होता है, जिसके चलते वे इन्हें फेंकने का मन भी नहीं बना पातीं। अब पटना की प्रिया रंजन इस समस्या का एक शानदार समाधान लेकर आई हैं। प्रिया अपने हुनर और क्रिएटिविटी के दम पर उन पुरानी साड़ियों को दोबारा पहनने योग्य और स्टाइलिश बना रही हैं। उनका यह अनूठा काम आज शहर में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां लोग अपनी यादों से जुड़ी साड़ियों को रिसाइकल कराने के लिए उनके पास पहुंच रहे हैं।

साड़ियों को मिलता है नया और ट्रेंडी अवतार

प्रिया रंजन का मानना है कि किसी भी साड़ी को नया लुक देना न केवल एक कला है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी बेहतर है। वह साड़ियों पर पूरी तरह से हाथों से पेंटिंग करती हैं और डाई का इस्तेमाल कर उनमें जान डाल देती हैं। इस प्रक्रिया के जरिए सालों पुरानी साड़ियों को आधुनिक फैशन के हिसाब से ढाला जा रहा है। ग्राहकों को अपनी पसंदीदा साड़ी को फिर से नया देखकर काफी खुशी मिलती है, और उन्हें बाजार से नई साड़ी खरीदने की जरूरत भी कम पड़ती है। यह तरीका बचत के साथ-साथ पुरानी धरोहर को संजोने का भी एक बेहतरीन माध्यम साबित हो रहा है।

सभी प्रकार के फैब्रिक पर होता है काम

प्रिया ने साझा किया कि वह किसी भी तरह के फैब्रिक पर काम करने में सक्षम हैं। चाहे साड़ी सिल्क की हो, तसर, शिफॉन या फिर कॉटन, हर तरह के कपड़े को नया रूप दिया जा सकता है। प्रिया के पास ग्राहकों के लिए डिजाइनों की एक विस्तृत श्रृंखला मौजूद होती है। वह ग्राहकों को अलग-अलग विकल्प दिखाती हैं, जिसमें से वे अपनी पसंद के अनुसार डिजाइन चुनते हैं। इसके बाद, उसी डिजाइन के आधार पर पुरानी साड़ी को पूरी तरह से मेकओवर दिया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया हैंडमेड होती है, जिससे हर साड़ी को एक यूनिक और स्टाइलिश लुक मिलता है जो किसी शोरूम में मिलने वाली साड़ी जैसा ही प्रीमियम लगता है।

50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं दिखा रही हैं दिलचस्पी

इस अनोखे रिसाइक्लिंग कॉन्सेप्ट को सभी उम्र की महिलाओं द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। प्रिया के अनुसार, 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं इस पहल में सबसे आगे हैं। वे अपनी वर्षों पुरानी और सहेज कर रखी हुई साड़ियों को दोबारा पहनने के लिए उत्साहित रहती हैं। जब उन्हें ये साड़ियां नए और आकर्षक अवतार में वापस मिलती हैं, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता। इसके अलावा, आजकल की नई पीढ़ी की लड़कियां भी अपनी मां की पुरानी साड़ियों को रिसाइकल करवाकर उन्हें आधुनिक अंदाज में पहन रही हैं। इससे परिवार की पुरानी यादें भी ताजा रहती हैं और उन्हें एक ट्रेंडी लुक भी मिल जाता है।

किफायती और स्टाइलिश विकल्प

साड़ियों को रिसाइकल करवाने का एक बड़ा फायदा इसका किफायती होना है। प्रिया बताती हैं कि इसमें बहुत अधिक खर्च नहीं आता है। डिजाइन और तकनीक के हिसाब से साड़ियों को सजाया जाता है। ग्राहकों के पास कलमकारी, मधुबनी पेंटिंग और फ्लोरल पेंटिंग जैसे कई विकल्प मौजूद होते हैं। इसके अलावा, स्टीमिंग और डाई जैसी तकनीकों का भी सहारा लिया जाता है, जिससे साड़ी बिल्कुल नई लगने लगती है। चूंकि काम की जटिलता अलग-अलग होती है, इसलिए चार्ज भी उसी के अनुसार तय किए जाते हैं।

कैसे करें संपर्क?

अगर आप भी अपनी पुरानी साड़ियों को नया रूप देना चाहते हैं, तो आप प्रिया रंजन से आसानी से जुड़ सकते हैं। इसके लिए आपको सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम का उपयोग करना होगा। आप इंस्टाग्राम पर आर्टलेट बाई प्रिया सर्च कर सकते हैं। वहां उनके काम के नमूने देखने के साथ-साथ आप अकाउंट पर सीधे संदेश भेजकर अपना ऑर्डर भी दे सकते हैं और अपनी पुरानी साड़ियों को फिर से नई पहचान दिला सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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