बलूचिस्तान के नुश्की में जनरल असिम मुनीर की सेना का हिटलर जैसा अत्याचार, निहत्थे नागरिकों को भुखमरी और नाकेबंदी से दी जा रही मौत विश्व एक घंटा पहले 3
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में नुश्की जिले को पाकिस्तानी सेना ने एक खुली जेल में तब्दील कर दिया है, जहां राशन, दवाओं और आवाजाही पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाकर नागरिकों को अमानवीय यातनाएं दी जा रही हैं।

नुश्की बना पाकिस्तानी सेना का नया अत्याचार केंद्र

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित नुश्की जिले में पाकिस्तानी सेना का क्रूर और बर्बर चेहरा दुनिया के सामने आया है। जनरल असिम मुनीर की फौज ने इस पूरे इलाके को एक ऐसी खुली जेल में बदल दिया है, जहां आम लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। बलोच नेशनल मूवमेंट (BNM) द्वारा किए गए ताजा खुलासों के मुताबिक, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान तानाशाह एडोल्फ हिटलर द्वारा अपनाई गई नाकेबंदी की तर्ज पर ही बलूचिस्तान में पूरी आबादी को सैन्य घेरे में ले लिया गया है। इस इलाके में राशन, जरूरी दवाइयां और यहां तक कि एम्बुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भी पाबंदी लगा दी गई है। पिछले केवल एक हफ्ते के भीतर 9 मासूम नागरिकों की निर्मम हत्या और दर्जनों युवाओं को जबरन लापता कर दिए जाने की घटनाओं ने पूरे इलाके में खौफ का माहौल पैदा कर दिया है।

खुली जेल में तब्दील नुश्की

इतिहास गवाह है कि नाजी जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर ने जिस तरह से इंसानों को चारों तरफ से घेरकर तड़पा-तड़पाकर मौत के घाट उतारा था, आज ठीक उसी तरह का बर्बर इतिहास बलूचिस्तान के नुश्की में दोहराया जा रहा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असिम मुनीर की कमान में सेना ने नुश्की को एक विशाल खुली जेल बना दिया है। हिटलर अपने कंसंट्रेशन कैंपों में जहरीली गैस का इस्तेमाल करके लोगों को मारता था, वहीं मुनीर की फौज बलूच नागरिकों की पूर्ण नाकेबंदी करके उन्हें दाना-पानी और दवाओं से वंचित रखकर धीरे-धीरे मौत के मुंह में धकेल रही है। बलोच नेशनल मूवमेंट (BNM) ने इस खौफनाक जमीनी हकीकत को उजागर करते हुए बताया है कि सेना ने जिले को चौतरफा घेर रखा है।

सड़कों पर सन्नाटा और घरों में कैद आम नागरिक

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, आम नागरिकों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगी हुई है। लोग अपने ही घरों में कैद होकर रह गए हैं, जबकि सेना ने पूरे इलाके में कर्फ्यू जैसे सख्त आदेश लागू कर रखे हैं। सड़कों पर भारी सन्नाटा पसरा है और सार्वजनिक परिवहन के सभी साधन बंद कर दिए गए हैं, जिससे किसी के लिए भी इस नर्क से बाहर निकलना असंभव हो गया है। जिस तरह से तानाशाह हिटलर अपनी सीमाओं के भीतर लोगों को बंदी बनाकर रखता था, उसी तरह असिम मुनीर के इशारे पर बलूचिस्तान के इस जिले को दुनिया से पूरी तरह काट दिया गया है।

पिक एंड किल की क्रूर नीति

बीएनएम के दावों के अनुसार, केवल पिछले एक सप्ताह में सेना ने कम से कम 9 बेकसूर बलूच नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया है। इसके अतिरिक्त, दर्जनों मासूम युवाओं को उनके घरों से उठाकर जबरन गायब किया गया है। पाकिस्तानी सेना की यह कुख्यात 'पिक एंड किल' की नीति कोई नई नहीं है, लेकिन नुश्की में जिस तरह से चुन-चुनकर नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है, उसने पूरे बलूचिस्तान को भय के साये में ढकेल दिया है। रात के अंधेरे में सेना के बख्तरबंद वाहन बस्तियों में दाखिल होते हैं और सुबह होते-होते या तो किसी का शव मिलता है या फिर वे हमेशा के लिए गायब हो जाते हैं।

भूख और बीमारी से मारने का नया षड्यंत्र

मुनीर की सेना ने बलूच लोगों को तड़पाने के लिए एक नया और अत्यंत घटिया तरीका अपनाया है। महीनों से जारी सैन्य नाकेबंदी के कारण नुश्की में भोजन के साथ-साथ बुनियादी दवाइयां पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। बाजारों को जबरन बंद करा दिया गया है। इस स्थिति का सबसे भयावह असर मासूम बच्चों, बेबस बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों पर पड़ रहा है। बच्चे भूख से बिलख रहे हैं और बीमार लोग इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। पाकिस्तानी सेना ने रसद आपूर्ति को रोककर एक पूरे जिले को धीमी मौत मरने के लिए मजबूर कर दिया है।

एम्बुलेंसों पर बैन और बाजारों में लूटपाट

पाकिस्तानी सेना की दरिंदगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस संकटकाल में भी एम्बुलेंसों को नहीं बख्शा जा रहा है। जीवन और मौत के बीच झूल रहे मरीजों को अस्पताल ले जाने तक की अनुमति नहीं दी जा रही है। एम्बुलेंसों को सेना के चेकपोस्टों पर रोक दिया जाता है। इसके अलावा, बीएनएम ने गंभीर आरोप लगाया है कि कर्फ्यू की आड़ में असिम मुनीर के सैनिक स्थानीय बाजारों में घुसकर खुलेआम लूटपाट मचा रहे हैं। आम नागरिकों की दुकानों के ताले तोड़कर सामान लूटा जा रहा है और निजी संपत्तियों को सरेआम नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

सामूहिक दंड का खेल

बलोच नेशनल मूवमेंट का स्पष्ट मानना है कि यह सब कुछ बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सरकार और सेना द्वारा अपनाई गई 'सामूहिक दंड' की सबसे घिनौनी नीति का हिस्सा है। जब सेना बलूच स्वतंत्रता सेनानियों का सामना करने में विफल रहती है, तो वह अपनी नाकामी का गुस्सा निहत्थे और बेकसूर नागरिकों पर निकालती है। संगठन का कहना है कि बलूचिस्तान में आजादी की मांग जिस तेजी से बढ़ रही है, उससे पाकिस्तानी सेना बौखला गई है। अपने गिरते हुए मनोबल को छिपाने के लिए सेना निर्दोषों पर जुल्म ढा रही है और इसे अपनी बड़ी सैन्य सफलता बताकर दुनिया को गुमराह करने का नाटक कर रही है।

अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग

पिछले सप्ताह 'बलोच यकजेहती कमेटी' (BYC) ने भी नुश्की में सेना की इस घेराबंदी और नाकेबंदी की कड़ी निंदा की थी। बीवाईसी ने स्पष्ट कहा है कि पूरी आबादी को इस तरह से सामूहिक सजा देना मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन है। विभिन्न बलूच संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से अपील की है कि वे बलूचिस्तान, विशेषकर नुश्की के इस मानवीय संकट पर तुरंत ध्यान दें। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त कदम उठाने की मांग की है ताकि पाकिस्तान की इस बर्बरता को रोका जा सके।

आजादी के संकल्प पर अडिग बलूच

इतने भारी जुल्म और सैन्य नाकेबंदी के बावजूद बलोच नेशनल मूवमेंट ने अपने लोगों से हिम्मत न हारने की अपील की है। बीएनएम ने बलूच जनता से एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा है कि जुल्म का यह दौर अधिक लंबा नहीं चलने वाला है। बलूच राष्ट्र की नियति केवल और केवल आजादी है और असिम मुनीर की सेना को इस मोर्चे पर आखिरकार करारी और शर्मनाक हार का सामना करना ही पड़ेगा।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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