ट्रेनों में परोसे जाने वाले खाने पर उठे सवाल, रेल मंत्री ने बताया पिछले 3 वर्षों का पूरा रिपोर्ट कार्ड व्यापार 2 घंटे पहले 3
ट्रेनों में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में जानकारी दी कि खराब खाने की शिकायतों पर रेलवे ने सख्त रुख अपनाया है और करोड़ों रुपये का जुर्माना वसूला है।

ट्रेनों में खाने की गुणवत्ता पर रेल मंत्रालय का बड़ा बयान

भारतीय रेल के सफर के दौरान मिलने वाले खाने की गुणवत्ता और साफ-सफाई हमेशा से यात्रियों के लिए एक बड़ा विषय रही है। हाल ही में राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि भारतीय रेलवे प्रतिदिन करोड़ों यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराती है। आंकड़ों के मुताबिक रेलवे साल भर में लगभग 58 करोड़ लोगों को खाना परोसती है। रेल मंत्री ने सदन को सूचित किया कि भोजन की गुणवत्ता को लेकर आने वाली शिकायतें बेहद कम हैं और इनका औसत महज 0.0008 प्रतिशत ही है। इसके बावजूद रेलवे प्रशासन यात्रियों की संतुष्टि को प्राथमिकता देते हुए दोषी वेंडरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहा है।

दोषी वेंडरों पर बड़ी कार्रवाई

पिछले 3 वर्षों के आंकड़ों का ब्यौरा देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि खाने की क्वालिटी और स्वच्छता के मानकों में कमी पाए जाने पर IRCTC ने कड़ा रुख अपनाया है। शिकायतों के आधार पर की गई विभागीय जांच के बाद दोषी पाए गए वेंडरों से कुल 5.13 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया है। इसके साथ ही, अनियमितताएं बरतने वाले 54 वेंडरों को कड़े 'कारण बताओ' नोटिस जारी किए गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 6 वेंडरों के कॉन्ट्रैक्ट भी पूरी तरह समाप्त कर दिए गए हैं।

प्रतिबंधित वेंडरों की जानकारी सार्वजनिक

रेल मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया है कि स्वच्छता और गुणवत्ता के नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी वेंडर को बख्शा नहीं जाएगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसे लाइसेंसधारी वेंडर जिनकी सेवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनकी सूची IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित रूप से प्रकाशित की जाती है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

गुणवत्ता और स्वच्छता के लिए रेलवे के ठोस कदम

ट्रेनों में परोसे जाने वाले भोजन की शुद्धता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए IRCTC और रेलवे के उच्चाधिकारी, जिनमें विशेष रूप से फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्त हैं, समय-समय पर औचक निरीक्षण करते रहते हैं। इन निरीक्षणों का मुख्य उद्देश्य भोजन बनाने की विधि, रसोई की स्वच्छता, स्टाफ का व्यवहार और उपकरणों के रखरखाव की बारीकी से जांच करना होता है। भारतीय रेलवे ने अपनी सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए निम्नलिखित उपाय लागू किए हैं:

  • भोजन की आपूर्ति के लिए केवल अधिकृत और निर्धारित बेस किचन का उपयोग किया जाता है।
  • देश के प्रमुख स्टेशनों पर आधुनिक और हाई-टेक बेस किचन की स्थापना की गई है।
  • रसोई में खाना पकाने की प्रक्रिया की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए CCTV कैमरों की व्यवस्था की गई है।
  • गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए केवल प्रसिद्ध और ब्रांडेड कच्चे माल का ही उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • बेस किचन में साफ-सफाई की निगरानी के लिए विशेष रूप से फूड सेफ्टी सुपरवाइजरों की तैनाती की गई है।
  • ट्रेनों में यात्रियों को सुविधा देने के लिए IRCTC के सुपरवाइजर तैनात किए जाते हैं।
  • भोजन के पैकेटों पर अब QR कोड लगाए जा रहे हैं, जिन्हें स्कैन कर यात्री पैकिंग की तारीख, लाइसेंसधारी का नाम और FSSAI लाइसेंस नंबर जैसी जानकारी हासिल कर सकते हैं।
  • बेस किचन और पेंट्री कार में नियमित रूप से गहरी सफाई के साथ-साथ समय-समय पर कीटनाशक छिड़काव (पेस्ट कंट्रोल) किया जाता है।
  • खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन के लिए FSSAI का सर्टिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है।
  • लगातार गुणवत्ता जांच के लिए नियमित रूप से खाने के सैंपल लिए जाते हैं।
  • कैटरिंग स्टाफ के लिए समय-समय पर ट्रेनिंग सेशन आयोजित किए जाते हैं, जिसमें सेवा का तरीका और विनम्र व्यवहार सिखाया जाता है।
  • गुणवत्ता जांच के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट और ग्राहकों से फीडबैक के लिए सर्वे कराए जाते हैं।
राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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