पटना का अनोखा पंचरूपी हनुमान मंदिर, जहां बजरंगबली अपने पांच भाइयों के साथ हैं विराजमान धर्म एक घंटा पहले 3
पटना के राजवंशी नगर में स्थित एक बेहद खास मंदिर में हनुमान जी अपने पांच भाइयों के साथ विराजते हैं, जहां श्रद्धालु एक साथ बजरंगबली के छह स्वरूपों के दर्शन कर सकते हैं।

पटना की पहचान बना पंचरूपी हनुमान मंदिर

बिहार की राजधानी पटना में भगवान हनुमान के कई प्रसिद्ध मंदिर मौजूद हैं, लेकिन शहर के राजवंशी नगर में एक ऐसा मंदिर है जो आस्था का अनूठा केंद्र बना हुआ है। बेली रोड पर स्थित इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां बजरंगबली अपने पांच भाइयों के साथ एक ही स्थान पर विराजमान हैं। इस मंदिर को पंचरूपी हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है। व्यस्त सड़क के किनारे होने के कारण यहां दिन-भर भक्तों की भीड़ लगी रहती है, जो अपने काम पर जाते समय प्रभु का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते। इस मंदिर की भव्यता और मान्यता इसे शहर के अन्य धार्मिक स्थलों से अलग बनाती है।

हनुमान जी के छह स्वरूपों का संगम

मंदिर के ज्योतिषाचार्य पंडित ओम तिवारी के अनुसार, इस मंदिर में हनुमान जी के कुल छह स्वरूपों के दर्शन होते हैं। इनमें से पांच स्वरूप उनके भाइयों के हैं, जबकि छठा स्वरूप राम दरबार में प्रभु श्री राम की सेवा करते हुए दिखाई देता है। धार्मिक ग्रंथों और ब्रह्मांड पुराण में माता अंजना के छह पुत्रों का वर्णन मिलता है, जिनमें हनुमान जी सबसे ज्येष्ठ थे। इसी पौराणिक मान्यता के आधार पर, सभी भाइयों की प्रतिमाएं यहां पूरी श्रद्धा के साथ स्थापित की गई हैं।

कौन थे हनुमान जी के पांच भाई

ज्योतिषाचार्य पंडित ओम तिवारी ने विस्तार से बताया कि भगवान हनुमान के पांच भाइयों के नाम मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान और धृतिमान थे। इन सभी भाइयों में अद्भुत क्षमताएं और अलग-अलग गुण समाहित थे:

  • मतिमान: इन्हें अत्यधिक बुद्धिमान और नीतिज्ञ माना जाता है।
  • श्रुतिमान: ये वेदों, शास्त्रों और साहित्य के प्रकांड विद्वान कहे गए हैं।
  • केतुमान: इन्हें एक अत्यंत वीर और पराक्रमी योद्धा माना जाता है जो अस्त्र-शस्त्र की विद्या में निपुण थे।
  • गतिमान: ये अपनी तीव्र गति और छलांग लगाने की कला के लिए विख्यात थे।
  • धृतिमान: ये अपने धैर्य, साहस और दृढ़निश्चय स्वभाव के लिए जाने जाते हैं।

खास बात यह है कि इन पांचों भाइयों में जो गुण थे, वे सभी भगवान हनुमान के व्यक्तित्व में भी समाहित थे। भक्तों के लिए इन सभी का एक साथ दर्शन करना सौभाग्य की बात मानी जाती है।

150 साल से भी अधिक पुराना इतिहास

पंचरूपी हनुमान मंदिर न केवल अपनी पौराणिक कथाओं के लिए, बल्कि अपनी प्राचीनता के लिए भी प्रसिद्ध है। यह मंदिर करीब 150 साल से अधिक पुराना है। इस मंदिर की सबसे प्रमुख आकर्षण यहां स्थापित 25 फीट ऊंची दक्षिणमुखी हनुमान जी की प्रतिमा है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का मानना है कि बिहार में हनुमान जी की इतनी विशाल प्रतिमा कहीं और देखने को नहीं मिलती।

दक्षिणमुखी हनुमान की महिमा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दक्षिणमुखी बजरंगबली की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं बहुत जल्दी पूरी होती हैं और उन्हें अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। चूंकि दक्षिण दिशा को काल का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिशा में मुख किए हुए हनुमान जी का पूजन करना विशेष फलदायी और लाभकारी माना गया है। मंदिर में आने वाले भक्त यह मानते हैं कि यहां दर्शन करने से सिद्धि और समृद्धि की प्राप्ति होती है। एक ही गर्भगृह में हनुमान जी और उनके भाइयों के दुर्लभ दर्शन का अनुभव भक्तों के मन को शांति और शक्ति से भर देता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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