पाली: सात समंदर पार बसे राहुल सिंह चौहान को नहीं भूली गांव की पाठशाला, स्कूल के लिए भेजे 4 लाख रुपये राजस्थान एक घंटा पहले 2
पाली जिले के जवाली गांव के प्रवासी भामाशाह राहुल सिंह चौहान ने विदेश में रहते हुए अपने गांव के राजकीय स्कूल के लिए 4 लाख रुपये की आर्थिक मदद भेजी है। यह राशि जिला कलेक्टर की 'आओ गांव चलें' मुहिम के तहत स्कूल का भव्य मुख्य द्वार बनाने में खर्च होगी।

कहा जाता है कि इंसान भले ही दुनिया के किसी भी कोने में जाकर बस जाए, लेकिन अपनी जन्मभूमि की मिट्टी की महक और बचपन में पढ़े स्कूल की यादें कभी उसके मन से ओझल नहीं होतीं। ऐसा ही एक मिसाल कायम करने वाला उदाहरण राजस्थान के पाली जिले के जवाली गांव के प्रवासी भामाशाह राहुल सिंह चौहान ने पेश किया है। मातृभूमि के प्रति उनके इस अनूठे लगाव और पहल की हर ओर सराहना हो रही है।

दरअसल, पाली के जिला कलेक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी ने जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक दूरदर्शी मुहिम शुरू की है, जिसका नाम 'आओ गांव चलें' है। जब इस अभियान की चर्चा सात समंदर पार बैठे प्रवासी भारतीय राहुल सिंह चौहान तक पहुंची, तो अपनी माटी का मोह उन्हें रोक नहीं सका। अपने सामाजिक और नैतिक दायित्वों को समझते हुए उन्होंने तत्काल अपने गांव के राजकीय स्कूल के कायाकल्प के लिए 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा कर दी। इस राशि से स्कूल का एक भव्य और आकर्षक मुख्य द्वार तैयार किया जाएगा।

क्या है इस अभियान का असल मकसद

पाली जिला प्रशासन के अनुसार, 'आओ गांव चलें' अभियान का प्रमुख उद्देश्य उन प्रवासी नागरिकों को अपनी जन्मभूमि की जरूरतों, बुनियादी आवश्यकताओं और विकास कार्यों से दोबारा जोड़ना है, जो अब बड़े शहरों या विदेशों में बस चुके हैं। इसका अंतिम लक्ष्य यह है कि सभी प्रवासी अपने गांव के विकास में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।

इस अभियान के तहत ग्रामीण इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य आधारभूत सुविधाओं समेत विभिन्न जनहितकारी कार्यों में जनसहयोग को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रशासन ने राहुल सिंह चौहान के इस सराहनीय योगदान की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है।

जवाली के राजकीय स्कूल को मिलेगा नया रूप

यह सच है कि किसी भी समाज और देश का संपूर्ण विकास केवल सरकारी बजट या योजनाओं के सहारे संभव नहीं है। इसके लिए 'अपनों' के विश्वास और मजबूत सहयोग की भी जरूरत होती है। जवाली गांव के राहुल सिंह चौहान ने स्कूल के मुख्य द्वार के लिए 4 लाख रुपये की राशि दान कर अन्य प्रवासियों के सामने एक अनुकरणीय मिसाल रखी है।

जिला कलेक्टर की यह 'आओ गांव चलें' योजना वास्तव में एक मजबूत पुल की तरह काम कर रही है, जो आधुनिक शहरों या विदेशों में बस चुके प्रवासियों को उनके गांव की गलियों और वहां की प्राथमिक जरूरतों से फिर से जोड़ रही है। यह योगदान इस बात का प्रतीक है कि अगर नीयत साफ और इरादे नेक हों, तो सात समंदर दूर बैठकर भी अपनी मातृभूमि के विकास में बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। इस पहल से अब स्कूल का प्रवेश द्वार न केवल सुंदर दिखेगा, बल्कि बच्चों के लिए भी गर्व का विषय बनेगा।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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