नई सोलर नीति: क्या छत पर सोलर पैनल लगवाना अब पड़ेगा महंगा? जानें ग्राहकों की जेब पर पूरा हिसाब भारत 13 घंटे पहले 1
सरकार ने 1 जून से नई सोलर पॉलिसी लागू कर दी है, जिसका मकसद देश में घरेलू सोलर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। इंडस्ट्री का मानना है कि इस बदलाव से ग्राहकों को रूफटॉप सिस्टम पर पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।

केंद्र सरकार ने 1 जून से सोलर पॉलिसी में एक बड़ा बदलाव लागू कर दिया है। इस फैसले का असर सिर्फ सोलर इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम ग्राहकों की जेब पर भी पड़ने वाला है। हालांकि इसका सबसे बड़ा फायदा लोकल मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा और आने वाले समय में बाजार में 'मेड इन इंडिया' सोलर पैनल ज्यादा दिखाई देंगे। सवाल यह है कि क्या अब घर की छत पर सोलर पैनल लगवाना महंगा हो जाएगा और ग्राहकों को कितना अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। आइए पूरा गणित विस्तार से समझते हैं।

आखिर क्या है नई सोलर पॉलिसी?

घरों की छतों पर लगने वाले सोलर पैनल कई चरणों वाली प्रक्रिया से तैयार होते हैं। पैनल में लगे सोलर सेल सूरज की रोशनी का इस्तेमाल कर बिजली पैदा करते हैं। भारत में आमतौर पर दो तरह के सोलर पैनल मिलते हैं। एक वे जिनमें सोलर सेल विदेशों से, खासकर चीन से, इंपोर्ट किए जाते हैं और फिर भारत में असेंबल किए जाते हैं। दूसरी ओर कुछ कंपनियां भारत में ही सोलर सेल बनाकर पूरी तरह लोकली पैनल मैन्युफैक्चर करती हैं।

नई पॉलिसी के तहत सरकार ने नई ALMM यानी अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल एंड मैन्युफैक्चरर्स जारी की है। इस सूची में केवल उन्हीं कंपनियों को जगह दी गई है जो भारत में ही सोलर सेल बनाकर बाजार में बेचती हैं।

सब्सिडी पर क्या होंगी नई शर्तें?

देश में ज्यादातर लोग पीएम सूर्य घर- मुफ्त बिजली योजना के तहत अपने घर पर सोलर पैनल लगवाते हैं। इस योजना के तहत सरकार छतों पर सोलर पैनल लगाने वालों को सब्सिडी देती है, जिससे उपभोक्ताओं को होने वाले खर्च में बड़ी बचत होती है।

नई व्यवस्था में अब इस योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं ग्राहकों को मिलेगा जो ALMM की नई लिस्ट-2 वाली कंपनियों के पैनल लगवाएंगे। सब्सिडी और नेट मीटरिंग की सुविधा भी इन्हीं पैनलों पर मिलेगी। इतना ही नहीं, पैनल में इस्तेमाल होने वाले सोलर सेल भी सरकार की तैयार की गई नई लिस्ट में शामिल होने चाहिए, ताकि देश में सिर्फ उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण ही इस्तेमाल हों। बिजनेस और इंडस्ट्रियल ग्राहकों को भी इसी अप्रूव्ड लिस्ट वाली कंपनियों के पैनल लगाने के लिए कहा गया है। हालांकि सोलर इंडस्ट्री से जुड़े डेवलपर्स ने सरकार से इस पॉलिसी की डेडलाइन बढ़ाने का अनुरोध किया था, ताकि वे लोकल मैन्युफैक्चरिंग की तैयारी कर सकें।

तैयार होगा नया सोलर इकोसिस्टम

सरकार देश में एक बड़ा घरेलू सोलर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम खड़ा करना चाहती है। पिछले कुछ वर्षों में भारत में सोलर मॉड्यूल बनाने की क्षमता तेजी से बढ़ी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत हर साल करीब 200 GW (गीगावॉट) के सोलर मॉड्यूल तैयार कर रहा है। लेकिन सोलर सेल की मैन्युफैक्चरिंग अभी भी काफी कम, यानी सालाना करीब 30 GW (गीगावॉट) ही है।

यही वजह है कि भारत में बनने वाले अधिकांश सोलर मॉड्यूल आज भी चीन से इंपोर्ट होने वाले सोलर सेल पर निर्भर हैं। नई पॉलिसी आने के बाद मॉड्यूल लोकली बने सोलर सेल पर आधारित होंगे, जिससे विदेश यानी चीन पर निर्भरता धीरे-धीरे घटेगी। इस तरह नई पॉलिसी से मेक इन इंडिया सोलर सेल का एक नया इकोसिस्टम तैयार हो सकेगा।

ग्राहकों पर कितना पड़ेगा असर?

इंडस्ट्री की मानें तो रूफटॉप सोलर सिस्टम के लिए ग्राहकों को अब प्रति किलोवॉट लगभग 3,000 रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ सकते हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि भारत में बने सोलर सेल, विदेश से इंपोर्ट किए गए सेल के मुकाबले महंगे पड़ते हैं। यानी अगर आप अपने घर में 5 किलोवॉट का सोलर सिस्टम लगवा रहे हैं तो आपको करीब 15,000 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे।

पॉलिसी लागू होने से पहले ही कई कंपनियां आगाह कर चुकी हैं कि पैनल की कीमत में और बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि अब सिर्फ अप्रूव्ड लिस्ट वाले पैनलों की मांग तेजी से बढ़ेगी। साथ ही, पीएम सूर्य घर योजना के तहत सब्सिडी पाने के लिए अब ज्यादा पेपर वर्क करना होगा और इसकी स्क्रूटिनी भी बढ़ जाएगी।

भारत में हर साल सोलर पैनल की मांग करीब 50 GW तक की रहती है, जिसमें से सिर्फ 25 से 30 GW पैनल ही देश में बनते हैं। यानी इंपोर्ट और घरेलू उत्पादन का अनुपात लगभग 50:50 का है। ऐसे में नई पॉलिसी के बाद लोकल मैन्युफैक्चर्ड पैनलों की मांग तेजी से बढ़ेगी, जिसका असर इनकी कीमतों पर भी दिख सकता है।

कितनी मिलती है सब्सिडी?

पीएम सूर्य घर- मुफ्त बिजली योजना के तहत घर की छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए सरकार की ओर से भारी सब्सिडी दी जाती है। इस योजना के तहत 1 किलोवॉट (1KW) का सोलर सिस्टम लगाने पर लगभग 30,000 रुपये की सब्सिडी मिलती है। वहीं, 2 किलोवॉट पर 60,000 रुपये और 3 किलोवॉट या उससे अधिक पर 78,000 रुपये की सब्सिडी मिलती है।

इसके अलावा कई राज्य सरकारें भी अपनी ओर से अतिरिक्त सब्सिडी दे रही हैं, जिससे ग्राहकों को सिस्टम लगवाने पर अच्छी-खासी बचत हो जाती है। साथ ही हर महीने 300 यूनिट्स तक की बिजली मुफ्त दी जाती है।

पीएम सूर्य घर योजना के लिए कैसे करें आवेदन?

इस योजना के तहत सब्सिडी पाने के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए पीएम सूर्य घर की वेबसाइट पर जाकर रजिस्टर वाले ऑप्शन पर क्लिक करें और आगे बढ़ें। अगले पेज पर आपको अपना राज्य, बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) और कंज्यूमर नंबर दर्ज करना होगा। इसके बाद मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी डालकर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करें।

  1. रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और OTP के जरिए वेबसाइट पर लॉग-इन करें।
  2. डैशबोर्ड पर दिए गए Apply For Rooftop Solar वाले ऑप्शन पर टैप करें।
  3. आगे की प्रक्रिया में आवेदन फॉर्म भरें और अप्रूवल का इंतजार करें।
  4. अप्रूवल मिलते ही पैनल लगवाने के लिए रजिस्टर्ड वेंडर का चयन करें।
  5. पैनल लग जाने के बाद DISCOM इसकी जांच कर वेरिफाई करेगा, जिसके बाद सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी सीधे आपके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।

क्या होगा फायदा?

घर की छत पर सोलर पैनल लगवाने से आपका मासिक बिजली बिल लगभग शून्य हो सकता है। ऑन-ग्रिड कनेक्शन लेने पर आपको पैनल लगवाने की सब्सिडी मिलने के साथ-साथ अतिरिक्त बिजली ग्रिड को भेजने पर उसका अमाउंट भी क्रेडिट होता है।

इस क्रेडिट हुए अमाउंट का इस्तेमाल आप रात के समय ग्रिड से ली जाने वाली बिजली के बदले कर सकते हैं। यानी अगर आप दिन में कम लोड इस्तेमाल करते हैं, तो रात के समय उसके एवज में पावर ग्रिड से बिजली की खपत कर सकते हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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