ममता बनर्जी को एक ही दिन में तीन बड़े झटके, चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट भारत एक घंटा पहले 2
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। नंदीग्राम और रेजिनगर उपचुनाव से पहले उन्हें कानूनी और राजनीतिक मोर्चों पर एक साथ तीन बड़े झटके मिले हैं।

चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने संकट गहरा गया है। राज्य में नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले ममता बनर्जी को एक के बाद एक तीन करारे झटके लगे हैं। सबसे पहले, भारतीय चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी की पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया है। इस फैसले के चलते आगामी उपचुनावों के लिए उनकी पार्टी को फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। आयोग के इस कदम को चुनौती देते हुए ममता बनर्जी ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

अपने ही खेमे से मिला बड़ा धोखा

ममता बनर्जी को दूसरा बड़ा झटका उनके अपने ही पाले से मिला है। नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए पार्टी ने संचिता प्रधान डे को अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्होंने ऐन वक्त पर अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। यह घटनाक्रम बेहद चौंकाने वाला इसलिए भी है क्योंकि नामांकन वापस लेने से कुछ घंटे पहले ही संचिता डे ने राज्य सचिवालय, नबन्ना में जाकर नंदीग्राम सीट से विधायक सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। अपने ही उम्मीदवार द्वारा अचानक हाथ खींच लेने से ममता बनर्जी की रणनीति को गहरा धक्का लगा है।

समर्थन वाले उम्मीदवार की गिरफ्तारी

ममता बनर्जी की मुसीबतों का सिलसिला यहीं नहीं थमा। अपनी उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने के बाद, ममता ने नंदीग्राम सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया था। हालांकि, जैसे ही ममता ने अपना समर्थन जाहीर किया, उसके कुछ ही देर बाद मिलन प्रधान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस तीसरी घटना ने ममता बनर्जी की राजनीतिक स्थिति को और भी कमजोर कर दिया है, जिससे पार्टी की तैयारियों पर बड़ा असर पड़ा है।

राजनीतिक गलियारों में तेज हुई बहस

इन घटनाओं के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। नंदीग्राम सीट से नामांकन वापस लिए जाने पर बीजेपी सांसद खगेन मुर्मू ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को यह अच्छी तरह समझ आ गया था कि यदि चुनाव लड़ा गया तो उन्हें हार का सामना करना पड़ेगा, जिससे उनकी प्रतिष्ठा पर आंच आती, इसलिए उन्होंने पीछे हटने में ही भलाई समझी। दूसरी तरफ, कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर टीएमसी नेता कुणाल घोष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बीजेपी सरकार पर चुनाव आयोग और पुलिस के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए इस गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है और मिलन प्रधान की तत्काल रिहाई की मांग दोहराई है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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