जिस कबाड़ को बेकार समझकर फेंक देते थे लोग, उसी से बने ऊंट, बाघ और भारत का नक्शा — नागौर में दिखेगा अनोखा नजारा राजस्थान एक घंटा पहले 3
नागौर के जड़ा तालाब में नगर परिषद 28 लाख रुपए की लागत से वेस्ट टू वेल्थ पार्क तैयार कर रही है, जहां लोहे के पुराने कबाड़ से ऊंट, मोर, बाघ और भारत का नक्शा बनाया जा रहा है। यह जगह अब शहर का नया फोटो शूट पॉइंट बनती जा रही है।

नागौर शहर को खूबसूरत बनाने के लिए जगह-जगह कबाड़ से आकर्षक कलाकृतियां गढ़ने का काम चल रहा है। इसी मुहिम के तहत शहर के जड़ा तालाब की तस्वीर अब पूरी तरह बदल रही है। कभी सुनसान पड़ी रहने वाली यह जगह आज एक सुंदर और देखने लायक स्थल में तब्दील हो रही है। यहां नगर परिषद की ओर से 28 लाख रुपए की लागत से वेस्ट टू वेल्थ प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है।

सीएम बजट घोषणा के तहत शुरू हुआ प्रोजेक्ट

यह काम मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के तहत शुरू हुआ है और इसकी सबसे खास बात यह है कि जिस लोहे के कबाड़ और बेकार पड़ी धातु को लोग किसी काम का न समझकर फेंक दिया करते थे, अब वही सामग्री तालाब की सुंदरता को नया रूप दे रही है। यहां दिल्ली की एजेंसी से आए कलाकार इसी कबाड़ से बेहतरीन कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं।

कबाड़ से तैयार हो रहीं भव्य आकृतियां

जड़ा तालाब पार्क में इस समय विशालकाय ऊंट, राष्ट्रीय पक्षी मोर और जंगल के राजा बाघ की लोहे की संरचनाएं बनाई जा रही हैं। इसके साथ ही भारत का एक भव्य नक्शा भी आकार ले रहा है, जो शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। नगर परिषद आयुक्त गोविंद सिंह भींचर के मुताबिक इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य राजस्थान की पहचान को सामने लाना है।

रचनात्मकता का संदेश

रेगिस्तान का जहाज कहलाने वाला ऊंट और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक भारत का नक्शा इस पार्क की जान साबित होंगे। इनके जरिए लोगों तक यह संदेश पहुंचेगा कि रचनात्मक सोच के साथ बेकार समझी जाने वाली चीजें भी मूल्यवान बन सकती हैं। बता दें कि कुछ महीने पहले इस काम की जिम्मेदारी दिल्ली की एक एजेंसी को सौंपी गई थी। प्रोजेक्ट के तहत लोहे के पुराने कबाड़ से ऊंट, भारत का नक्शा, टाइगर और मोर जैसी आकृतियां बनाई जा रही हैं।

पर्यावरण और पुन: उपयोग का सकारात्मक संदेश

एजेंसी की ओर से लोहे के पुराने कबाड़ और अनुपयोगी धातु से कई आकर्षक संरचनाएं तैयार की जा रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इससे न सिर्फ पार्क की खूबसूरती बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के दोबारा इस्तेमाल को लेकर भी एक सकारात्मक संदेश जाएगा। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत ऊंट, भारत का नक्शा, बाघ और मोर जैसी आकृतियां बनाई जा रही हैं, जिनमें ऊंट का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

नगर परिषद आयुक्त गोविंद सिंह भींचर ने बताया कि भारत का नक्शा लोगों को देश की भौगोलिक समझ से जोड़ने का माध्यम बनेगा, वहीं राष्ट्रीय पक्षी मोर और बाघ अपनी खास शैली में पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। नगर परिषद के अनुसार जड़ा तालाब में विकसित हो रहा यह वेस्ट टू वेल्थ पार्क शहर के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। यहां आने वालों को आकर्षक नजारे तो देखने को मिलेंगे ही, साथ ही यह प्रोजेक्ट यह भी बताएगा कि कबाड़ समझी जाने वाली वस्तुएं भी सही सोच और रचनात्मकता से कीमती बन सकती हैं।

शहर की छवि होगी मजबूत

उन्होंने बताया कि जड़ा तालाब का यह नया स्वरूप शहर की छवि को और मजबूत करेगा तथा इसे एक आधुनिक और पर्यावरण के प्रति जागरूक शहर के रूप में स्थापित करेगा। आने वाले समय में यह जगह सामाजिक गतिविधियों और घूमने-फिरने के लिए एक प्रमुख स्थल के तौर पर उभर सकती है। इसके अलावा यह नागौर के लोगों के लिए एक नया फोटो शूट पॉइंट भी बनेगा।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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