राजस्थान
4 घंटे पहले
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आधुनिक कृषि क्षेत्र में किसानों के लिए कम लागत में अधिक और बेहतर फसल उत्पादन हासिल करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। ऐसे में मल्चिंग तकनीक किसानों के लिए कम लागत में फसल का उत्पादन बढ़ाने और सिंचाई पर होने वाले खर्च को घटाने का एक बेहद उपयोगी और असरदार तरीका बनकर उभरी है।
क्या है मल्चिंग तकनीक?
इस तकनीक के अंतर्गत पौधों के आस-पास की खुली मिट्टी को किसी जैविक या कृत्रिम सामग्री से ढक दिया जाता है। इस विधि में मुख्य रूप से पुआल, सूखी पत्तियों या फिर विशेष प्रकार की प्लास्टिक शीट का उपयोग करके मिट्टी को ढका जाता है। ऐसा करने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक सुरक्षित बनी रहती है और वह सीधे हवा व धूप के संपर्क में नहीं आती है।
मल्चिंग तकनीक से मिलने वाले बड़े फायदे
इस आधुनिक कृषि तकनीक को अपनाने से किसानों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त होते हैं:
- पानी की भारी बचत: मिट्टी की नमी बरकरार रहने के कारण फसलों को बार-बार सींचने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे सिंचाई के पानी की करीब 30 से 50 प्रतिशत तक बचत होती है।
- खरपतवार पर नियंत्रण: ढकी हुई मिट्टी के कारण अनचाहे खरपतवारों की वृद्धि रुक जाती है। इससे खेतों में निराई-गुड़ाई करने और इस काम के लिए लगने वाली मजदूरी का खर्च काफी कम हो जाता है।
- जड़ों की सुरक्षा: मिट्टी को ढकने से उसका तापमान नियंत्रित रहता है। तापमान संतुलित रहने के कारण पौधों की संवेदनशील जड़ों को अत्यधिक गर्मी, सर्दी और पाले के प्रकोप से राहत मिलती है।
- मिट्टी के कटाव से बचाव: तेज बारिश के दौरान यह तकनीक मिट्टी के सीधे संपर्क में आने वाले पानी के प्रभाव को कम करती है, जिससे मिट्टी का कटाव रुकता है।
इन फसलों में है विशेष रूप से लाभकारी
मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल वैसे तो कई प्रकार की फसलों में किया जा सकता है, लेकिन बागवानी और कुछ विशेष फसलों के लिए इसे बेहद फायदेमंद माना गया है। विशेष रूप से टमाटर, मिर्च, खरबूज और तरबूज जैसी फसलों की खेती में इस तकनीक का उपयोग करने से पैदावार और गुणवत्ता में काफी सुधार देखने को मिलता है।
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