राधा अष्टमी 2026: जीवन में प्रेम और खुशहाली लाने के लिए इस दिन घर लाएं ये 5 शुभ वस्तुएं धर्म एक घंटा पहले 6
राधा अष्टमी के पावन पर्व पर राधा रानी की विशेष कृपा पाने के लिए पूजा-अर्चना और व्रत का बड़ा महत्व है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस शुभ तिथि पर कुछ खास चीजों को घर लाना सुख और समृद्धि का कारक माना जाता है।

राधा अष्टमी का विशेष महत्व

राधा अष्टमी का पर्व मुख्य रूप से प्रेम, त्याग और अटूट भक्ति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में राधा रानी को भगवान श्रीकृष्ण के प्रति निष्काम प्रेम और समर्पण का सबसे बड़ा प्रतीक माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जब तक भक्त राधा रानी की आराधना नहीं करते, तब तक कृष्ण भक्ति पूर्ण नहीं मानी जाती। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है, जो राधा रानी के धरती पर अवतरण का दिन है। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से व्रत रखते हैं और राधा-कृष्ण के प्रेम का स्मरण करते हुए अपने जीवन में सुख और सौभाग्य की कामना करते हैं।

पूजा और शुभ समय

वैदिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि का प्रारंभ 18 सितंबर को दिन के 1 बजकर 2 मिनट पर होगा। इस तिथि का समापन 19 सितंबर को दोपहर 3 बजकर 28 मिनट पर होगा। उदया तिथि की मान्यता को देखते हुए इस वर्ष राधा अष्टमी का त्योहार 19 सितंबर, दिन शनिवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखते हैं और राधा-कृष्ण की पूजा करते हैं, उन्हें विशेष फल की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और संतान संबंधी सुखों की प्राप्ति होती है। भक्ति के मार्ग पर चलने वालों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है, क्योंकि राधा नाम का जाप करने वाले भक्तों के पास स्वयं भगवान श्रीकृष्ण खींचे चले आते हैं।

राधा अष्टमी पर घर लाएं ये 5 शुभ चीजें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राधा अष्टमी के दिन कुछ विशिष्ट वस्तुओं को घर लाना अत्यंत शुभ माना गया है। इन चीजों को घर में स्थापित करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पारिवारिक सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है:

  • मोर पंख: राधा अष्टमी पर मोर पंख को घर लाना बहुत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर का वातावरण शांत और सकारात्मक बना रहता है। आप इसे राधा-कृष्ण की तस्वीर या प्रतिमा के पास रखकर विशेष पूजा भी कर सकते हैं।
  • बांसुरी: भगवान कृष्ण को बांसुरी अति प्रिय है, इसलिए इसे प्रेम और मधुरता का प्रतीक माना जाता है। राधा अष्टमी के दिन इसे घर लाने और राधा-कृष्ण के पूजा स्थल पर रखने से परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम और तालमेल बढ़ता है।
  • तुलसी का पौधा: हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यंत पवित्र माना गया है। यदि आपके घर में तुलसी का पौधा नहीं है, तो राधा अष्टमी का दिन इसे घर लाने के लिए सबसे उपयुक्त है। इससे घर में सुख-शांति और संपन्नता का वास होता है।
  • गुलाल: राधा रानी को गुलाल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। राधा अष्टमी पर घर में गुलाल लाना और उसे राधा रानी के चरणों में अर्पित करना खुशियों का संचार करने वाला माना जाता है।
  • पायल: इस विशेष दिन पर चांदी की पायल या बिछिया खरीदना सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। पूजा के दौरान इन्हें राधा रानी के चरणों से स्पर्श कराकर किसी सुहागिन महिला को उपहार में देना या स्वयं धारण करना दांपत्य जीवन के लिए सुखद होता है।

भक्ति और समृद्धि का मार्ग

राधा अष्टमी का व्रत मनुष्य के जीवन में न केवल सौभाग्य लाता है, बल्कि भक्त को राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम का अधिकारी भी बनाता है। जो भी श्रद्धालु इस दिन पूरी निष्ठा से पूजा और ध्यान करते हैं, उन्हें भक्ति मार्ग पर स्थिरता प्राप्त होती है और प्रभु की कृपा सदैव बनी रहती है। इस दिन किया गया दान और पूजा-पाठ पूरे परिवार के लिए कल्याणकारी सिद्ध होता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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