उत्तर प्रदेश
2 घंटे पहले
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परंपरागत खेती से हटकर नई राह
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में कृषि का परिदृश्य बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। जिले के किसान अब पारंपरिक फसलों के स्थान पर प्राकृतिक उत्पादों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। इस बदलाव की कहानी के केंद्र में मुरादाबाद के कैलाश कुमार जैसे किसान हैं, जिन्होंने शहद के उत्पादन को अपनी आजीविका का मुख्य जरिया बनाया है। बिना मिलावट वाले शुद्ध शहद की मांग के कारण यह व्यवसाय उनके लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है।
शहद उत्पादन और एफपीओ का मॉडल
कैलाश कुमार न केवल शहद की दर्जनों किस्मों को तैयार कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने एक एफपीओ यानी किसान उत्पादक संगठन के माध्यम से काम को आगे बढ़ाया है। इस संगठन के जरिए वे न केवल अपनी पैदावार को बाजार तक पहुंचा रहे हैं, बल्कि आस-पास के दर्जनों अन्य किसानों को भी अपने साथ जोड़कर प्रशिक्षित कर रहे हैं। संगठित होकर काम करने के कारण उन्हें बेहतर दाम मिल रहे हैं।
बाजार में भारी डिमांड
कैलाश कुमार द्वारा उत्पादित शहद की शुद्धता की गारंटी ने इसे स्थानीय बाजार से लेकर जिले के बाहर तक बेहद लोकप्रिय बना दिया है। ग्राहकों के बीच भरोसे के चलते इस शहद की भारी मांग बनी रहती है। आधुनिक तकनीकों और प्राकृतिक खेती के तालमेल से कैलाश कुमार हर महीने लाखों रुपये की शानदार कमाई कर रहे हैं, जो अन्य किसानों के लिए एक बड़ी प्रेरणा का विषय है।
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