उत्तर प्रदेश
2 महीने पहले
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विचारों
सहफसली खेती का फायदा
फिरोजाबाद के रहने वाले किसान सचिन ने खेती के पारंपरिक तरीकों में बदलाव कर एक नई मिसाल पेश की है। वे अपने खेतों में गन्ने की मुख्य फसल के साथ मूंग और उड़द जैसी फसलें उगा रहे हैं। इस तकनीक को सहफसली खेती कहा जाता है, जिससे उन्हें कम लागत में अधिक मुनाफा मिल रहा है।
बिना खाद के बेहतर पैदावार
सचिन अपनी खेती में किसी भी तरह के रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं करते हैं। उनकी पूरी खेती प्राकृतिक है, जिससे न केवल मिट्टी की सेहत बनी रहती है, बल्कि फसलों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। गन्ने के साथ इन दालों को उगाने से खेत में नाइट्रोजन का स्तर प्राकृतिक रूप से बढ़ जाता है, जो गन्ने की फसल के लिए बेहद फायदेमंद है।
मिट्टी की उर्वरता में सुधार
सहफसली खेती की एक बड़ी विशेषता यह है कि कटाई के बाद फसलों के अवशेष मिट्टी में ही मिल जाते हैं। ये अवशेष प्राकृतिक खाद का काम करते हैं, जिससे खेत की उर्वरक क्षमता में लगातार इजाफा हो रहा है। यही कारण है कि उन्हें 1 बीघे जमीन से 80 हजार रुपये तक की कमाई हो रही है।
विविध फसलों का चुनाव
सचिन केवल गन्ने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आलू और गन्ने की खेती के दौरान क्यारियों का सही इस्तेमाल भी करते हैं। वे इन क्यारियों में चना, मटर और सौंफ जैसी फसलें भी उगाते हैं। इस तरह की खेती का सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसान को एक ही समय और एक ही लागत में दोहरी फसल का उत्पादन मिल जाता है।
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