राष्ट्रीय राजनीति
50 मिनट पहले
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दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में लगी आग के बाद अब बिहार के मुजफ्फरपुर से भी झकझोर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। दोनों घटनाओं के बाद सबसे बड़ा प्रश्न यही उठ रहा है कि आखिर इन हादसों की असली जिम्मेदारी किसकी है। आग पर काबू पाया जा चुका है, जांच भी शुरू हो गई है और गिरफ्तारियां भी हो रही हैं, मगर बहस अब किसी एक होटल या अस्पताल तक सीमित नहीं रह गई है। चर्चा का दायरा अब उन हजारों इमारतों और तंग गलियों तक फैल गया है, जहां किसी भी रोज ऐसा हादसा दोहराया जा सकता है।
मालवीय नगर होटल में सामने आईं गंभीर लापरवाहियां
मालवीय नगर के जिस होटल में आग लगी, वहां शुरुआती जांच में कई बड़ी खामियां उजागर हुई हैं। बताया जा रहा है कि होटल के पास फायर एनओसी मौजूद नहीं थी, प्रवेश और निकासी का सही प्रबंध नहीं था और बेसमेंट तक में कमरे बना दिए गए थे।
फायर ब्रिगेड की टीम को बेसमेंट तक पहुंचने के लिए लोहे की ग्रिल काटनी पड़ी, जिसके बाद धुएं से भरे कमरों में फंसे कई लोगों को बाहर निकाला जा सका। इस दौरान कई लोगों की जान तो बच गई, लेकिन कुछ परिवारों को कभी न भरने वाला नुकसान झेलना पड़ा।
मुजफ्फरपुर के अस्पताल में दर्दनाक हादसा
दूसरी ओर मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे बिहार को हिला कर रख दिया है। अस्पताल के आईसीयू में लगी आग और फैले धुएं के कारण चार मरीजों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए।
घायलों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। हालत यह थी कि कई मरीज बिस्तर से उठकर बाहर निकलने की स्थिति तक में नहीं थे। दम घुटने के चलते कुछ मरीजों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना के बाद सामने आई तस्वीरें हादसे की भयावहता को खुद बयां कर रही हैं।
हादसों के बाद तेज हुई सियासी बयानबाजी
इन घटनाओं के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे हैं। कोई पिछले प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर रहा है, तो कोई मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है।
लेकिन आम लोगों के मन में सवाल सिर्फ एक है — अगर इमारत में इतनी सारी खामियां पहले से मौजूद थीं, तो समय रहते कार्रवाई आखिर क्यों नहीं की गई।
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