उत्तर प्रदेश
48 मिनट पहले
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प्रयागराज का यह मामला सिर्फ एक हत्याकांड भर नहीं है, बल्कि उस भरोसे के दरकने की दास्तान है जहां परिवार के सबसे करीबी दायरे में मौजूद लोग ही मौत की पटकथा रच डालते हैं। आर्थिक दबाव, कर्ज और लालच ने मिलकर ऐसी खौफनाक साजिश को जन्म दिया, जिसमें एक ही परिवार के चार लोगों की जान चली गई। प्रयागराज पुलिस का दावा है कि इस साजिश में सनी गुप्ता की भूमिका भी कुछ ऐसी ही रही। आइए जानते हैं कि पूरे प्रकरण में सनी गुप्ता का किरदार आखिर क्या था।
इस सनसनीखेज वारदात में पुलिस ने सिर्फ 12 घंटे के भीतर ऐसा खुलासा किया, जिसने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। एक ही परिवार के चार सदस्यों की हत्या के पीछे कोई पेशेवर गिरोह नहीं, बल्कि घर के बेहद नजदीकी लोग ही जिम्मेदार निकले। पूरी जांच में सनी गुप्ता की भूमिका सबसे अहम कड़ी बनकर उभरी। एडिशनल पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) डॉ. अजयपाल शर्मा ने इस पूरे घटनाक्रम का विस्तार से ब्योरा साझा किया।
पुलिस को शुरू से ही यह संदेह था कि हत्या करने वाला कोई बाहरी व्यक्ति नहीं है। घर और दुकान, दोनों जगह बाहर से ताले लगे मिले थे। ऊपर के रास्तों और संभावित प्रवेश-निकास बिंदुओं की गहन पड़ताल के बाद पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि आरोपी वारदात के बाद मुख्य गलियारे से होकर बाहर निकला था।
ताले ने दिया पहला सुराग, सीसीटीवी ने खोला पूरा राज
डॉ. अजयपाल शर्मा के अनुसार, जांच टीम ने इलाके में लगे निजी और पुलिस के आई-ट्रिपल-सी (I3C) कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की और यहीं से केस की पूरी दिशा बदल गई। फुटेज में एक संदिग्ध व्यक्ति नजर आया, जो पहले मृतक वीरेंद्र वैश्य के जूते पहने हुए था। इसके बाद की फुटेज में वही व्यक्ति चप्पल पहनकर बाहर निकलता दिखाई दिया। पुलिस को यह बदलाव असामान्य लगा और जांच का फोकस इसी बिंदु पर बढ़ा दिया गया।
उधर पोस्टमार्टम से पहले शवों की स्थिति, रिगर मॉर्टिस, शरीर में आई सूजन और अन्य संकेतों के आधार पर यह अनुमान लगाया गया कि हत्या 36 से 48 घंटे पहले की गई थी। इसी टाइमलाइन के अनुसार फुटेज की पड़ताल की गई, तो पता चला कि सुबह करीब साढ़े चार से पांच बजे के बीच एक व्यक्ति घटनास्थल से निकलता दिखा था। यहीं से सनी गुप्ता और अभिषेक वैश्य तक पहुंचने की राह साफ होने लगी।
कौन है सनी गुप्ता?
पुलिस जांच में सामने आया कि सनी गुप्ता कोई हिस्ट्रीशीटर नहीं है और उसके खिलाफ पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला। सनी की समोसे-कचौड़ी की दुकान उसी परिसर में थी, जहां वैश्य परिवार का कारोबार चलता था। उसने करीब 7.5 लाख रुपये में दुकान लेकर किराये पर व्यवसाय शुरू किया था। इसी दौरान उसकी अभिषेक वैश्य से गहरी दोस्ती हो गई।
दोस्ती इतनी प्रगाढ़ हो गई कि सनी ने अभिषेक को पैसे तक उधार दे दिए थे। पुलिस के मुताबिक, अभिषेक पहले से ही कई लोगों से कर्ज ले चुका था और आर्थिक दबाव झेल रहा था। सनी भी उन्हीं लोगों में शामिल था, जिनका पैसा अभिषेक पर बकाया था।
रविवार दोपहर रची गई थी खौफनाक साजिश
पुलिस जांच में जो सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया, वह था हत्या की योजना बनाए जाने का समय। अधिकारियों के अनुसार, रविवार दोपहर करीब 3 बजे से 5 बजे के बीच अभिषेक वैश्य और सनी गुप्ता उसकी दुकान पर साथ बैठे थे और इसी दौरान दोनों ने हत्या की साजिश रची।
यह योजना केवल चोरी तक सीमित नहीं थी। पुलिस के मुताबिक दोनों ने पहले अभिषेक के पिता वीरेंद्र वैश्य, उनकी पत्नी और बेटी की हत्या की साजिश बनाई और फिर उसे अंजाम दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपियों ने घर में मौजूद सोने-चांदी के जेवर और नकदी समेट ली।
पुलिस के अनुसार, चुराया गया सामान बाद में सनी गुप्ता की ‘वेस्टिज’ नाम की दुकान तक भी पहुंचाया गया। जांचकर्ताओं का मानना है कि वारदात के बाद दोनों ने सबूत छिपाने और लूटे गए माल को सुरक्षित रखने की कोशिश की। इतना ही नहीं, घटनास्थल से निकलते समय कपड़ों, जूतों और गतिविधियों में आए बदलाव ने भी पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग दिए।
कैसे 12 घंटे में सुलझ गया केस?
इस केस के खुलासे में चार बातें निर्णायक साबित हुईं—
- घर और दुकान पर बाहर से लगे ताले।
- घटनास्थल से निकलने के संभावित रास्तों का वैज्ञानिक परीक्षण।
- निजी और पुलिस सीसीटीवी कैमरों की बारीकी से जांच।
- शवों की स्थिति के आधार पर हत्या की सटीक टाइमलाइन तैयार करना।
इन सुरागों को आपस में जोड़ते हुए पुलिस सीधे सनी गुप्ता तक पहुंच गई और महज 12 घंटे में पूरे हत्याकांड का पर्दाफाश कर दिया।
पुलिस सनी गुप्ता तक कैसे पहुंची?
सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल पर लगे तालों और हत्या की टाइमलाइन के विश्लेषण से पुलिस ने संदिग्ध की गतिविधियों को ट्रैक किया। फुटेज के आधार पर ही सनी गुप्ता तक पहुंच बनाई गई।
सनी गुप्ता और अभिषेक वैश्य का क्या संबंध था?
दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी। सनी की दुकान उसी परिसर में थी और उसने अभिषेक को पैसे भी उधार दे रखे थे।
हत्या की साजिश कब रची गई थी?
पुलिस के अनुसार, रविवार दोपहर 3 बजे से 5 बजे के बीच अभिषेक वैश्य की दुकान पर बैठकर दोनों ने वारदात की योजना तैयार की थी।
पुलिस ने 12 घंटे में केस कैसे सुलझाया?
सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक संकेतों, शवों की स्थिति, घटनास्थल की जांच और संदिग्धों की गतिविधियों के विश्लेषण के दम पर पुलिस ने तेजी से आरोपियों की पहचान कर ली।
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