महाराष्ट्र: क्रिकेट खेलते वक्त 12 साल के बेटे की मौत, पिता को हत्या का शक तो ढाई महीने बाद कब्र से निकाला गया शव महाराष्ट्र 3 महीने पहले 41
जलगांव के रेल गांव में 15 मार्च को क्रिकेट खेलते समय 12 वर्षीय गणेश नवल पाटिल की मौत हो गई थी, पर पिता को हत्या का संदेह था। ढाई महीने बाद पुलिस ने जमीन में दफन शव को बाहर निकालकर नए सिरे से जांच शुरू कर दी है।

जलगांव: महाराष्ट्र के जलगांव जिले की धरनगांव तहसील के रेल गांव में क्रिकेट खेलते समय 12 साल के गणेश नवल पाटिल की मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। यह घटना मार्च में सामने आई थी, लेकिन बच्चे के पिता शुरू से ही इसे हादसा मानने को तैयार नहीं थे। उन्हें यकीन था कि उनके बेटे की हत्या की गई है। आखिरकार ढाई महीने बाद गणेश का शव कब्र से बाहर निकाला गया और उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। अब रिपोर्ट से ही मौत की असली वजह सामने आ सकेगी।

15 मार्च 2026 को हुई थी मौत

12 साल के गणेश नवल पाटिल की मौत 15 मार्च को हुई थी। उस समय बताया गया था कि क्रिकेट खेलते वक्त उसकी जान चली गई। मगर पिता को इस बात पर भरोसा नहीं हुआ और उन्हें आशंका थी कि बेटे की हत्या हुई है। डेढ़ महीने से भी अधिक समय तक वे अपने बेटे को न्याय दिलाने की कोशिश में थाने से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के दफ्तरों तक चक्कर काटते रहे। इंसाफ के लिए उनकी भागदौड़ लगातार जारी रही।

अंततः ढाई महीने बाद जमीन में दफन गणेश का शव बाहर निकाला गया। पिता नवल पाटिल का आरोप है कि एक पुराने झगड़े के चलते उनके बेटे के दोस्त ने ही उसके सीने पर बैट से वार कर उसकी हत्या कर दी। फोरेंसिक टीम, पुलिस और तहसीलदार की मौजूदगी में शव को बाहर निकाला गया। बेटे का शव देखकर पिता फूट-फूटकर रो पड़े। पंचनामे के बाद शव को ऑटोप्सी के लिए धुले के सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भेज दिया गया।

12 साल के गणेश नवल पाटिल की संदिग्ध मौत के इस मामले में पिता द्वारा शक जताए जाने पर पुलिस ने नए सिरे से जांच शुरू कर दी है।

बेटे का कंकाल देखकर पिता हुए बेसुध

जिस बेटे को पिता ने 12 साल तक अपने कलेजे के टुकड़े की तरह प्यार से पाला, आज वही जब कंकाल के रूप में उनके सामने आया तो वे बेसुध हो गए। जलगांव की धरनगांव तालुका के रेल गांव के रहने वाले गणेश नवल पाटिल की संदिग्ध मौत के मामले में पिता के संदेह के बाद पुलिस ने दोबारा जांच का सिलसिला शुरू किया है। इसी कड़ी में फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम, पुलिस अधिकारियों और धरनगांव के तहसीलदार की मौजूदगी में गांव के नजदीक नदी किनारे दफनाए गए गणेश के शव को ढाई महीने बाद बाहर निकाला गया।

पूरी प्रक्रिया प्रशासन की निगरानी में कैमरे में दर्ज की गई। इस दौरान अपने इकलौते बेटे का कंकाल देखकर पिता नवल पाटिल बेसुध हो गए। इसके बाद शव को आगे की जांच और ऑटोप्सी के लिए धुले के हीरे सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेज दिया गया। अब गणेश की मौत की सही वजह ऑटोप्सी रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगी और इस मामले के पीछे का सच क्या है, इस पर पूरे जिले की निगाहें टिकी हुई हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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