बिहार
2 घंटे पहले
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मानसून में बढ़ जाता है पशुओं की बीमारियों का खतरा
बरसात का मौसम आते ही पशुपालकों की चिंताएं बढ़ जाती हैं क्योंकि इस दौरान पशुओं में कई संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका रहती है। इन बीमारियों में लंपी स्किन डिजीज (LSD) सबसे खतरनाक मानी जाती है, जिसके कारण पशुपालकों को न केवल पशुओं के स्वास्थ्य से बल्कि बड़े आर्थिक नुकसान से भी जूझना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीमारी के प्रकोप के बाद उपचार करने से बेहतर है कि पहले से ही बचाव के कड़े इंतजाम किए जाएं। सही स्वच्छता, समयबद्ध टीकाकरण और कुछ घरेलू नुस्खों का प्रयोग करके पशुओं को इस घातक रोग से महफूज रखा जा सकता है।
नीम, हल्दी और कपूर से तैयार करें विशेष घोल
पशुपालन विशेषज्ञ एवं गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. सुषमा सुमन ने लंपी बीमारी से बचाव के लिए एक अत्यंत प्रभावी घरेलू उपाय साझा किया है। इस उपाय को तैयार करने की विधि काफी सरल है और पशुपालक इसे अपने घर पर ही आसानी से बना सकते हैं।
- सबसे पहले 2 लीटर साफ पानी लें।
- इसमें लगभग 1 किलो नीम की ताजी पत्तियां डालें।
- मिश्रण को तब तक उबालें जब तक पानी जलकर आधा यानी करीब 1 लीटर न रह जाए।
- पानी ठंडा हो जाने पर इसमें 50 ग्राम हल्दी पाउडर अच्छी तरह मिला लें।
- अंत में इस मिश्रण में 8 से 10 कपूर की गोलियां पीसकर डाल दें।
डॉ. सुषमा सुमन के अनुसार, यह घोल पशुओं की त्वचा के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है। नीम में प्राकृतिक रूप से जीवाणुरोधी और विषाणुरोधी तत्व मौजूद होते हैं, जबकि हल्दी संक्रमण को पनपने से रोकने में मदद करती है। कपूर की तीव्र गंध मक्खी और मच्छरों जैसे कीटों को दूर रखती है, जो अक्सर बीमारी फैलाने का मुख्य कारण बनते हैं। नियमित रूप से इस घोल का उपयोग करके पशुओं को नहलाने से उन्हें संक्रमण से बचाया जा सकता है। इसके साथ ही, पशुओं के बाड़े की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए और आसपास नीम की पत्तियों का धुआं या छिड़काव भी किया जा सकता है।
टीकाकरण और विशेषज्ञों की सलाह
घरेलू नुस्खों के अलावा वैज्ञानिक उपायों को अपनाना भी अनिवार्य है। डॉ. सुषमा सुमन का कहना है कि पशुपालकों को अपने दुधारू और गर्भवती पशुओं को समय पर कृमिनाशक दवाएं अवश्य देनी चाहिए। लंपी स्किन डिजीज के प्रति सावधानी बरतते हुए उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी है कि अगर पशुओं में सुस्ती, शरीर पर गांठें पड़ना, तेज बुखार या त्वचा पर घाव जैसे असामान्य लक्षण दिखें, तो बिना देरी किए पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
वर्तमान में लंपी स्किन डिजीज से बचाव के लिए प्रभावी टीका भी उपलब्ध है। बिहार सरकार का पशुपालन विभाग समय-समय पर टीकाकरण अभियान चलाता है, जिसका लाभ सभी पशुपालकों को उठाना चाहिए। अंत में, विशेषज्ञ का यही सुझाव है कि स्वच्छता, संतुलित आहार और समय पर टीकाकरण ही पशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाने का सबसे उत्तम मार्ग है।
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