इंदौर डबल मर्डर केस: च्युइंग गम बनी कातिल के सजा का आधार, कोर्ट ने सुनाई दोहरी उम्रकैद मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 5
इंदौर में साल 2020 में हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड में कोर्ट ने आरोपी धनंजय यादव को दोषी करार देते हुए दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस केस को सुलझाने में घटनास्थल से मिली एक च्युइंग गम से मिले डीएनए साक्ष्य ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई।

इंदौर हत्याकांड का चौंकाने वाला फैसला

मध्य प्रदेश के इंदौर में साल 2020 में हुए एक रोंगटे खड़े कर देने वाले दोहरे हत्याकांड में आखिरकार न्याय की जीत हुई है। अदालत ने करीब छह साल तक चली सुनवाई के बाद इस सनसनीखेज मामले में अपना फैसला सुना दिया है। आरोपी धनंजय यादव को पति-पत्नी की हत्या का दोषी पाते हुए अदालत ने उसे दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि पुलिस के पास कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं था, लेकिन विज्ञान की मदद से एक छोटी सी चीज ने कातिल को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

घटनास्थल से मिला एकमात्र सुराग

साल 2020 में जब ज्योतिप्रसाद शर्मा और उनकी पत्नी नीलम शर्मा की उनके ही घर में हत्या कर दी गई थी, तो पुलिस के लिए यह गुत्थी सुलझाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। घर का दरवाजा बाहर से बंद था और अंदर दंपति के शव पड़े थे। शुरुआती जांच में पुलिस को कोई ठोस सुराग या गवाह नहीं मिला, जिससे अपराधी तक पहुंचा जा सके। हालांकि, फोरेंसिक जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल से एक च्युइंग गम का टुकड़ा मिला। यह छोटी सी चीज इस हत्याकांड की जांच में मील का पत्थर साबित हुई। पुलिस ने जब इस च्युइंग गम का डीएनए विश्लेषण करवाया, तो उसका मिलान आरोपी धनंजय यादव से हो गया। यही वैज्ञानिक सबूत अंततः अदालत में आरोपी को सजा दिलाने का मुख्य आधार बना।

नाबालिग बेटी से संबंध और विवाद

जांच के दौरान कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। पुलिस के अनुसार, आरोपी धनंजय यादव का मृतक दंपति की नाबालिग बेटी के साथ संपर्क था। दंपति इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे, जो विवाद का मुख्य कारण बना। घटना के वक्त बेटी नाबालिग थी, इसलिए उससे संबंधित कानूनी प्रक्रिया जुवेनाइल कोर्ट में अलग से चल रही है। जिस समय यह घटना हुई, दंपति का बेटा घर पहुंचा तो उसने घर पर ताला लगा देखा और अंदर माता-पिता के शव देखकर पुलिस को सूचित किया। उस समय बेटी वहां से गायब थी। बाद में पुलिस ने आरोपी के साथ ही किशोरी को भी ढूंढ निकाला था और दोनों ने अपना अपराध कबूल किया था।

अदालत में पेश किए गए पुख्ता सबूत

अदालत में इस मामले को साबित करने के लिए पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज का सहारा लिया। सरकारी पक्ष की ओर से कुल 25 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। इसके अलावा डीएनए रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को अदालत के समक्ष मजबूती से पेश किया गया। इन्हीं ठोस प्रमाणों के आधार पर अदालत ने धनंजय यादव को दोषी ठहराया और दोहरी उम्रकैद के साथ-साथ 33 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला इस बात का जीवंत प्रमाण है कि आधुनिक युग में वैज्ञानिक जांच तकनीक किसी भी अपराधी को कानून से बचने का मौका नहीं देती, चाहे घटनास्थल पर कोई चश्मदीद गवाह मौजूद न हो। अब आरोपी को अपने किए की सजा के रूप में शेष जीवन जेल में ही बिताना होगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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