सिर्फ 60 डिसमिल जमीन पर भिंडी की खेती से अनिल शाव ने 3 महीने में कमाए 90 हजार रुपये, छोटी जोत बनी कमाई का जरिया झारखंड 2 घंटे पहले 6
बोकारो के तातरी गांव के किसान अनिल शाव ने महज 60 डिसमिल जमीन पर भिंडी उगाकर तीन महीने में दोगुने से ज्यादा मुनाफा कमाया है। करीब 25 हजार रुपये की लागत से उन्होंने 70 से 90 हजार रुपये तक की आमदनी का इंतजाम कर लिया।

अगर खेती सही तकनीक और मेहनत के साथ की जाए तो कम जमीन में भी बढ़िया कमाई संभव है। इसकी मिसाल पेश कर रहे हैं बोकारो जिले के जरीडीह प्रखंड के तातरी गांव के किसान अनिल शाव, जो सिर्फ 60 डिसमिल जमीन पर भिंडी की खेती कर तीन महीने में दोगुने से अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। उनका कहना है कि सही देखभाल हो तो छोटी सी जोत से भी अच्छी आमदनी ली जा सकती है।

परिवार की परंपरा को बनाया व्यवसाय

खास बातचीत में अनिल शाव ने बताया कि वे एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। बचपन से ही उन्होंने अपने पूर्वजों और परिवार के लोगों को खेतों में मेहनत करते देखा है। खेती-किसानी की पारिवारिक जिम्मेदारी को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने भी खेती को ही अपना पेशा बनाया और आज इसी से अच्छी कमाई कर रहे हैं।

90 दिन में तैयार हुई फसल

अनिल बताते हैं कि उन्होंने जनवरी के आखिरी सप्ताह में भिंडी की बुवाई की थी और करीब 90 दिनों के भीतर फसल तैयार हो गई। अप्रैल महीने से तुड़ाई शुरू हुई, जो अभी जून तक लगातार जारी है। उनका मानना है कि भिंडी ऐसी फसल है जिससे किसानों को लंबे समय तक नियमित आय मिलती रहती है। फसल एक बार तैयार होने के बाद करीब दो महीने तक लगातार तुड़ाई की जा सकती है।

लागत और उत्पादन

अनिल के मुताबिक, 60 डिसमिल जमीन में भिंडी की खेती करने में करीब 25 हजार रुपये की लागत आती है। अच्छी देखभाल मिले तो इससे करीब 45 से 60 क्विंटल तक उत्पादन हासिल किया जा सकता है।

बाजार में मिल रहा यह भाव

फिलहाल हाट में भिंडी 15 से 20 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रही है। अनिल अपनी अधिकांश उपज टुपकाडीह हाट और आसपास के बाजारों में बेचते हैं। उनका कहना है कि पूरे सीजन में औसतन 50 से 60 क्विंटल उत्पादन होने पर 70 हजार से 90 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है। वहीं एक एकड़ में भिंडी की खेती से एक लाख रुपये आसानी से कमाए जा सकते हैं।

कीट है बड़ी चुनौती

भिंडी की खेती में आने वाली दिक्कतों पर अनिल ने बताया कि फसल में अक्सर कीट लगने की समस्या सामने आती है। ऐसे में समय-समय पर उचित दवाओं का छिड़काव कर फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है। उनका कहना है कि कुछ छोटी-छोटी सावधानियां बरती जाएं तो फसल अच्छी होगी और मुनाफा भी तगड़ा मिलेगा।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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