कोटा की लाख चूड़ियां: 55 डिग्री गर्मी की तपिश में भी निखरता है कारीगरों का हुनर राजस्थान एक महीने पहले 33
राजस्थान के कोटा में बनी लाख की रंग-बिरंगी चूड़ियां आज भी भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं। 55 डिग्री तक की भीषण गर्मी में भी कारीगर इन्हें पारंपरिक तरीके से हाथों से बनाते हैं, जो उनकी मेहनत और कला का अद्भुत प्रदर्शन है।

भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग: लाख की चूड़ियां

राजस्थान के कोटा में बनने वाली रंग-बिरंगी लाख की चूड़ियां भारतीय संस्कृति और परंपरा का आज भी एक अभिन्न हिस्सा बनी हुई हैं। इनकी खूबसूरती और पारंपरिक महत्व इन्हें खास बनाता है।

शादी-त्योहारों पर खास मांग

शादी-ब्याह के शुभ अवसरों, तीज-त्योहारों और अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों पर इन चूड़ियों की विशेष मांग रहती है। ये सिर्फ एक आभूषण नहीं, बल्कि भारतीय परंपराओं का प्रतीक भी हैं।

लाख की चूड़ी बनाने की पारंपरिक प्रक्रिया

इन मनमोहक चूड़ियों को बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह से पारंपरिक और हाथों से की जाती है। इस कला में कारीगरों की सालों की मेहनत और अनुभव झलकता है।

  • सबसे पहले कच्चे माल, जिसे “चापड़ी” कहा जाता है, उसे गर्म किया जाता है।
  • गर्म होने के बाद इसमें विभिन्न खूबसूरत रंग मिलाए जाते हैं।
  • अंत में, इस रंगीन लाख को कुशलता से आकार देकर आकर्षक चूड़ियों में बदल दिया जाता है।

कठिन परिस्थितियों में भी जीवित कला

भयंकर गर्मी और अन्य मुश्किलों के बावजूद, कोटा के कारीगर इस प्राचीन और खूबसूरत कला को आज भी सहेजे हुए हैं। उनकी लगन और हुनर ही है जो इन रंग-बिरंगी चूड़ियों को जीवंत रखता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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