दिल्ली
3 घंटे पहले
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दिल्ली मेट्रो और एक अनूठा अनुभव
दिल्ली मेट्रो की यात्रा के दौरान 'अगला स्टेशन राजीव चौक है, दरवाजे दायीं तरफ खुलेंगे' जैसी घोषणाएं शायद दिल्लीवासियों के कान में रची-बसी हैं। ये आवाज इतनी प्रसिद्ध है कि लोग इसे कहीं और भी सुन लें तो तुरंत पहचान जाते हैं। लेकिन हाल ही में इस आवाज के पीछे छिपे दिग्गज वॉइस आर्टिस्ट और दूरदर्शन के पूर्व एंकर शम्मी नारंग ने एक बेहद खूबसूरत किस्सा दुनिया के सामने रखा है। यह किस्सा उनके पोते रुशान की पहली मेट्रो यात्रा से जुड़ा है, जिसने इस अनुभव को एक यादगार पल में बदल दिया।
जब दादू की आवाज ने पोते को किया हैरान
शम्मी नारंग जब अपने छोटे पोते रुशान को पहली बार मेट्रो में सैर कराने ले गए, तो उन्हें भी यह अंदाजा नहीं था कि उनका पोता अपनी प्रतिक्रिया कैसे देगा। जैसे ही ट्रेन में शम्मी नारंग की रिकॉर्ड की गई आवाज गूंजी, रुशान एकदम चौंक गया। घर में जिस आवाज को वह हर दिन सुनता है और जिसके साथ वह खेलता है, उसे अचानक सार्वजनिक स्थान पर मेट्रो के डिब्बे में सुनकर वह चकित रह गया। रुशान ने इधर-उधर देखना शुरू कर दिया कि आखिर उसके दादू की आवाज यहां कैसे आ रही है, जबकि उस समय वह खुद अपने दादाजी की गोद में ही बैठा हुआ था। यह दृश्य शम्मी नारंग के लिए भी काफी भावुक और खास था।
शम्मी नारंग का सोशल मीडिया पर संदेश
शम्मी नारंग ने इस पूरी घटना को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा करते हुए एक भावनात्मक पोस्ट लिखा है। उन्होंने कहा कि भले ही वह हमेशा के लिए इन मेट्रो ट्रेनों में यात्रा न कर सकें, लेकिन उन्हें इस बात का गहरा गर्व है कि उनकी आवाज एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक यात्रा करती रहेगी। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि यह आवाज न केवल उन तक और उनके पोते रुशान तक सीमित रहेगी, बल्कि आने वाले समय में रुशान की आने वाली पीढ़ियों तक भी पहुंचेगी। उन्होंने इसे एक ऐसी विरासत बताया है जो समय के साथ आगे बढ़ती रहेगी।
एक ऐसी आवाज जो बन गई विरासत
शम्मी नारंग के अनुसार, उनके पोते ने भले ही इस आवाज को पहले भी कई बार सुना हो, लेकिन सार्वजनिक परिवहन के इतने बड़े माध्यम में अपने दादा की आवाज सुनना एक अलग ही अहसास था। यह अहसास उसे अचंभित कर देने वाला था। नारंग का मानना है कि यह केवल एक घोषणा करने वाली आवाज नहीं है, बल्कि यह समय के साथ एक विरासत के रूप में स्थापित हो चुकी है। उनके शब्दों में, यह सिलसिला यहीं नहीं रुकेगा बल्कि भविष्य में भी उनके परिवार की आने वाली नस्लें इसी आवाज को मेट्रो में सुनेंगी।
दर्शकों के लिए खास पल
इस पूरी घटना ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा है। लोग न केवल शम्मी नारंग की आवाज की प्रशंसा कर रहे हैं, बल्कि दादा और पोते के इस खास पल को भी खूब सराह रहे हैं। दिल्ली मेट्रो के सफर में अब तक लाखों लोग इस आवाज को सुनकर अपनी मंजिल तक पहुंचते रहे हैं, लेकिन एक छोटे बच्चे की मासूम हैरानी ने इस आवाज को एक मानवीय और भावनात्मक आयाम दिया है। शम्मी नारंग ने इस यात्रा को अपनी जिंदगी के सबसे खास अनुभवों में से एक बताया है, जहां तकनीक और पारिवारिक विरासत का अद्भुत मिलन देखने को मिला।
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