उपनाम: पारंपरिक कला
अंबाला: 100 साल पुरानी मिट्टी कला को जिंदा रखे हुए हैं देवराज, नई पीढ़ी के लिए बने प्रेरणा
हरियाणा के अंबाला में एक परिवार अपनी पुश्तैनी कला को पूरी शिद्दत से आगे बढ़ा रहा है। 75 वर्षीय देवराज पिछले कई दशकों से मिट्टी के बर्तन बनाने की अपनी पारिवारिक परंपरा को बखूबी निभा रहे हैं।
राजस्थान की अनूठी विरासत: जयपुर में खुली राज्य की पहली लोक संगीत वाद्ययंत्र गैलरी
जयपुर के झालाना में राजस्थान की पहली स्थायी लोक संगीत वाद्ययंत्र गैलरी का शुभारंभ किया गया है, जहाँ प्रदेश के अलग-अलग अंचलों के 100 से अधिक दुर्लभ और पारंपरिक वाद्ययंत्र एक साथ देखे जा सकते हैं।
प्लास्टिक के दौर में भी नहीं टूटी बांसफोड़ परिवारों की जिद, कोडरमा में हुनर से जिंदा रखी है पुश्तैनी परंपरा
कोडरमा में बांसफोड़ समुदाय के 30 से 40 परिवार प्लास्टिक की बढ़ती चुनौतियों के बावजूद अपनी पारंपरिक कला को जिंदा रखे हुए हैं। बेहद कम कमाई होने के बावजूद ये लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ीगत हुनर के जरिए पर्यावरण के अनुकूल बांस के सामान बनाकर जीवन यापन कर रहे हैं।
पाली का अनूठा रंगरेज हुनर: आधुनिकता के दौर में भी सिगड़ी और भगोले से बरकरार है पारंपरिक रंगाई की चमक
राजस्थान के पाली में उदयपुरिया बाजार के रंगरेज आज भी अपनी सदियों पुरानी पारंपरिक विधि से कपड़ों को रंग रहे हैं, जिसे वे सिगड़ी और भगोले का उपयोग करके तैयार करते हैं।
छत्तीसगढ़ की कोसा साड़ियों का देशभर में डंका, नत्थूराम देवांगन की मेहनत से 35 सालों से बुन रही है सफलता की कहानी
छत्तीसगढ़ के बालोद के बुनकर नत्थूराम देवांगन पिछले 35 वर्षों से कोसा साड़ियों के पारंपरिक हुनर को जीवित रखे हुए हैं और अपनी कला से देश के बड़े शहरों में पहचान बना चुके हैं।
बोकारो के 80 वर्षीय बुजुर्ग की मेहनत, हाथों से रस्सियां बनाकर बचा रहे हैं पुश्तैनी कला
झारखंड के बोकारो में 80 साल के दिगम जी अपनी पुरानी कला को आज भी जिंदा रखे हुए हैं। वे प्लास्टिक के बोरों से मजबूत रस्सियां बनाकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
दरभंगा की प्रीति का जुनून: चौथी कक्षा से शुरू हुआ मिथिला पेंटिंग का सफर, अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने का है सपना
दरभंगा की प्रीति कुमारी ने चौथी कक्षा से ही मिथिला पेंटिंग को अपना लिया था। ग्रेजुएशन कर रहीं प्रीति अब इस पारंपरिक कला को न केवल अपना करियर बनाना चाहती हैं, बल्कि इसे देश-दुनिया तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भरतपुर के लालपुर गांव की अनोखी पहचान: हाथों से बनी देसी जूतियों की देश भर में मची धूम
राजस्थान के भरतपुर जिले का लालपुर गांव अपनी हस्तशिल्प कला के लिए चर्चा में है। यहाँ के कारीगर पीढ़ियों से हाथों से जूतियां तैयार कर रहे हैं, जिनकी मांग शहरों तक पहुँच चुकी है।
कोटा की लाख चूड़ियां: 55 डिग्री गर्मी की तपिश में भी निखरता है कारीगरों का हुनर
राजस्थान के कोटा में बनी लाख की रंग-बिरंगी चूड़ियां आज भी भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं। 55 डिग्री तक की भीषण गर्मी में भी कारीगर इन्हें पारंपरिक तरीके से हाथों से बनाते हैं, जो उनकी मेहनत और कला का अद्भुत प्रदर्शन है।