कोटा रेलवे स्टेशन का बदलेगा स्वरूप: 207.63 करोड़ के प्रोजेक्ट से मिलेंगी वर्ल्ड क्लास सुविधाएं व्यापार एक घंटा पहले 6
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत कोटा जंक्शन का कायाकल्प किया जा रहा है, जहाँ यात्रियों को वीआईपी लाउंज से लेकर आधुनिक बजट होटल तक की सुविधाएं मिलेंगी।

तेजी से जारी है निर्माण कार्य

कोटा रेलवे स्टेशन अब एक आधुनिक हब के रूप में विकसित होने की राह पर है। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत रेलवे द्वारा स्टेशन के कायाकल्प की प्रक्रिया काफी तेजी से आगे बढ़ रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कुल 207.63 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे डीआरएम अनिल कालरा ने बताया कि परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए 400 से अधिक कर्मचारी दिन-रात दो अलग-अलग पारियों में मुस्तैदी से जुटे हुए हैं।

प्लेटफॉर्म्स का हो रहा आधुनिकीकरण

स्टेशन के पुनर्विकास कार्य के तहत प्लेटफॉर्म्स को नया रूप दिया जा रहा है। वर्तमान में प्लेटफॉर्म नंबर 4 का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है, जबकि प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर काम पूरी गति से जारी है। रेलवे प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि यात्रियों को कम से कम असुविधा हो और निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ जल्द से जल्द संपन्न हो।

यात्रियों को मिलेंगी ये खास सुविधाएं

स्टेशन का कायाकल्प होने के बाद यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कई अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। प्रस्तावित सुविधाओं में प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • सुगम आवाजाही के लिए आधुनिक लिफ्ट और एस्केलेटर।
  • वीआईपी यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष वीआईपी लाउंज।
  • यात्रियों के रुकने के लिए एक बजट अनुकूल बजट होटल।
  • वाहन खड़ा करने के लिए व्यवस्थित और विस्तृत पार्किंग क्षेत्र।

दिसंबर 2026 तक पूरा होगा लक्ष्य

रेलवे की ओर से इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक नया डेडलाइन निर्धारित किया गया है। काम की बढ़ती गति को देखते हुए अधिकारियों ने इस पूरे कायाकल्प को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। यह बदलाव कोटा स्टेशन को न केवल एक नया रूप देगा, बल्कि आने वाले समय में यात्रियों के लिए यात्रा को अधिक आरामदायक और सुविधाजनक भी बनाएगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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