कोडरमा की इस दुकान का अचार सालों नहीं होता खराब, जानिए इसके पीछे का राज झारखंड एक घंटा पहले 2
कोडरमा के नंदी बाबा चौक स्थित 'सेठ जी अचार भंडार' में एक दर्जन से अधिक किस्मों के अचार मिलते हैं, जिनकी कीमत 240 से 400 रुपये प्रति किलो तक है। शुद्ध मसालों और मिल से पिसवाए सरसों तेल के इस्तेमाल से यहां का अचार वर्षों तक खराब नहीं होता।

भारतीय भोजन में अचार का अपना अलग ही स्थान है। दाल-भात हो, रोटी-सब्जी या फिर गरमागरम पराठा—थोड़ा-सा अचार साथ में मिल जाए तो खाने का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। आम, नींबू और मिर्च के अचार तो बाजार में हर जगह आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन मौसमी फलों और सब्जियों से तैयार होने वाले कई अचार पूरे साल उपलब्ध नहीं रहते। ऐसे में कोडरमा के नंदी बाबा चौक के पास स्थित 'सेठ जी अचार भंडार' लोगों के बीच एक खास पहचान बनाता जा रहा है।

एक दर्जन से अधिक किस्मों का खजाना

दुकान संचालक संतोष कुमार बताते हैं कि उनके यहां एक-दो नहीं, बल्कि एक दर्जन से अधिक प्रकार के अचार मौजूद रहते हैं। ग्राहकों को एक ही जगह पर कई वैरायटी मिल जाती हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • आम और नींबू
  • कटहल और गाजर
  • लहसुन और अदरक
  • आंवला और करौंदा
  • ओल और मिर्च
  • मिक्स अचार

अलग-अलग स्वाद और इतनी सारी किस्मों की वजह से दूर-दूर से लोग यहां अचार खरीदने पहुंचते हैं।

खुद की निगरानी में तैयार होते मसाले और तेल

संतोष कुमार के अनुसार, उनकी दुकान की सबसे बड़ी खासियत अचार की शुद्धता और गुणवत्ता है। अचार बनाने में इस्तेमाल होने वाले मसालों की पिसाई उनकी अपनी निगरानी में करवाई जाती है, ताकि हल्दी, मिर्च और बाकी मसालों की गुणवत्ता बरकरार रहे। इसके साथ ही अचार में पड़ने वाला सरसों का तेल भी सीधे मिल से पिसवाकर मंगाया जाता है। यही वजह है कि अचार का स्वाद और गुणवत्ता दोनों लंबे समय तक बने रहते हैं।

240 से 400 रुपये प्रति किलो तक कीमत

दुकान में अचार की कीमत 240 रुपये प्रति किलो से शुरू होकर 400 रुपये प्रति किलो तक जाती है। 240 रुपये प्रति किलो की दर पर नींबू मसाला, आम, मिर्च और ओल जैसे लोकप्रिय अचार उपलब्ध हैं, जबकि कुछ विशेष एवं प्रीमियम किस्मों के अचार की कीमत इससे अधिक रखी गई है।

सालों तक नहीं बिगड़ता स्वाद

संतोष कुमार का कहना है कि अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। अचार निकालते समय हमेशा सूखे और साफ चम्मच का ही इस्तेमाल करना चाहिए। यदि अचार को नमी से बचाकर रखा जाए तो उसका स्वाद वर्षों तक बना रहता है। यही कारण है कि सेठ जी अचार भंडार का अचार स्थानीय लोगों के बीच खूब पसंद किया जा रहा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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