एआई के इस्तेमाल पर उठे सवाल, अकासा एयर के खिलाफ 1.08 करोड़ के मुआवजे पर हाईकोर्ट की रोक दिल्ली 3 महीने पहले 45
दिल्ली हाईकोर्ट ने साकेत कमर्शियल कोर्ट द्वारा अकासा एयर पर लगाए गए 1.08 करोड़ रुपये के मुआवजे के आदेश पर रोक लगा दी है। यह मामला 640 हवाई टिकटों की बुकिंग रद्द होने से जुड़ा है, जिसके फैसले में एआई के संभावित इस्तेमाल पर अदालत ने गंभीर चिंता जताई।

एक ऐसे मामले में जिसने न्यायिक प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल पर बहस छेड़ दी है, दिल्ली हाईकोर्ट ने अकासा एयर को बड़ी राहत दी है। अदालत ने साकेत जिला कमर्शियल कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें एयरलाइन को 1.08 करोड़ रुपये का मुआवजा चुकाने के लिए कहा गया था। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को तैयार करने में एआई टूल्स के संभावित इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

क्या है पूरा मामला

यह विवाद दिल्ली की एबीएस टूर एंड ट्रैवल कंपनी द्वारा बुक किए गए 640 हवाई टिकटों की बुकिंग रद्द किए जाने से जुड़ा है। साकेत जिला कमर्शियल कोर्ट ने आरोप साबित होने के बाद अकासा एयर को ट्रैवल एजेंसी को 1.08 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह रकम एजेंसी को होने वाले संभावित नुकसान के आधार पर तय की थी।

एयरलाइन का तर्क

अकासा एयर का इस मामले में कहना था कि ट्रैवल एजेंसी ने एयरलाइन के नियमों के अनुसार जरूरी अग्रिम जमा राशि नहीं दी थी। इसी कारण एयरलाइन ने टिकटों की बुकिंग रद्द कर दी और जमा की गई राशि वापस लौटा दी थी।

फैसले में एआई के इस्तेमाल पर शक

समाचार एजेंसी के अनुसार, मामले में पेंच तब फंसा जब फैसले को लिखने में एआई के इस्तेमाल का संदेह उभरा। जस्टिस प्रतिभा सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच ने 30 अप्रैल को दिए अपने आदेश में टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के कुछ हिस्से एआई की मदद से तैयार किए गए हैं।

हाईकोर्ट ने पाया कि फैसले में ऐसे कानूनी प्रावधानों का उल्लेख किया गया जो वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं हैं। इसके अलावा, केस कानूनों में अंतर करने के तरीके और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की गलत व्याख्या ने भी अदालत को संदेह में डाल दिया। बेंच ने कहा कि न्यायिक नजीरों के आधार पर ऐसी बातें कहना, जो असल में मौजूद ही नहीं हैं, गंभीर चिंता का विषय है।

मुनाफे की गणना में गड़बड़ी

दिल्ली हाईकोर्ट ने मुआवजे की गणना के तरीके पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने टिकटों की पूरी कीमत को ही एजेंसी का मुनाफा मान लिया, जबकि टिकट खरीदने में आने वाली लागत को इसमें से घटाया ही नहीं गया। हाईकोर्ट के अनुसार, मुनाफा निकालने का यह तरीका कानूनी रूप से सही नहीं माना जा सकता।

अब आगे क्या

इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने फिलहाल जिला अदालत के आदेश पर रोक लगा दी है। इस मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 को होगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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