देश का 'वॉटर टावर' कहलाने वाले उत्तराखंड की राजधानी में पानी की किल्लत, देहरादूनवासी बोले- जमाना बदल गया उत्तराखंड एक घंटा पहले 2
जिस उत्तराखंड को देश का 'वॉटर टावर' कहा जाता है, उसी की राजधानी देहरादून से प्राकृतिक जल स्रोत लगभग गायब हो गए हैं और अब एक घूंट पानी के लिए भी जेब ढीली करनी पड़ती है।

कभी देहरादून में गर्मियों की पहचान यहां की नहरें, प्राकृतिक जल स्रोत, रिस्पना और बिंदाल जैसी नदियां तथा बाजारों में राहगीरों की प्यास बुझाने वाले प्याऊ हुआ करते थे। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। जिस उत्तराखंड को देश का 'वॉटर टावर' कहा जाता है, उसी की राजधानी से पानी के स्रोत लगभग लुप्त हो चुके हैं।

प्याऊ की जगह अब वॉटर एटीएम

लोगों की प्यास बुझाने के लिए सरकार ने बाजारों में 'वॉटर बैंक' यानी वॉटर एटीएम तो लगवा दिए हैं, लेकिन यहां एक घूंट पानी पाने के लिए भी जेब ढीली करनी पड़ती है। मुफ्त में पानी पिलाने की पुरानी परंपरा अब कहीं पीछे छूटती दिख रही है।

'पहले पानी पिलाना पुण्य का काम था'

देहरादून के रहने वाले डॉ. प्रेमचंद शर्मा का कहना है कि अब समय पूरी तरह बदल चुका है। उन्होंने बताया कि पहले गर्मियों में राहगीरों को पानी पिलाना पुण्य का काम माना जाता था, लेकिन आज वही पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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