विश्व
2 घंटे पहले
5
विचारों
संयुक्त राष्ट्र के मंच से फिर भारत को घेरा
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच का गलत इस्तेमाल करते हुए भारत के आंतरिक मामले में अपनी राय रखी है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान उन्होंने कश्मीर का मुद्दा उठाकर एक विवाद को जन्म दिया है। इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी वहां मौजूद थे, जिनके सामने एर्दोगन ने कश्मीर सहित दक्षिण एशिया के तमाम विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने की वकालत की।
भारत का रुख रहा है हमेशा स्पष्ट
भारत ने दशकों से इस बात को स्पष्ट किया है कि कश्मीर उसका पूरी तरह से आंतरिक मामला है। तुर्की के ऐसे बयानों पर नई दिल्ली पहले भी कड़ा ऐतराज जता चुकी है। भारत का मानना है कि किसी भी अन्य देश को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने या सलाह देने का कोई अधिकार नहीं है।
पहले भी सामने आए हैं एर्दोगन के ऐसे बयान
एर्दोगन के लिए कश्मीर का नाम लेना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी वह कई बार ऐसे मंचों का सहारा ले चुके हैं। मुख्य घटनाक्रम इस प्रकार हैं:
- वर्ष 2019 में भी एर्दोगन ने कश्मीर पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद भारत ने उन्हें कूटनीतिक जवाब दिया था।
- वर्ष 2021 में भी इसी तरह का घटनाक्रम दोहराया गया था।
- दोनों ही मौकों पर नई दिल्ली ने तुर्की को स्पष्ट किया था कि उसे कूटनीति और इतिहास के तथ्यों को ठीक से समझने की जरूरत है।
भारत हमेशा से यह कहता आया है कि तुर्की को पाकिस्तान के प्रभाव से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत को समझना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तरह की बयानबाजी से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ता है, जिसे लेकर भारत ने समय समय पर तुर्की सरकार को चेताया भी है।
Comments
0 comment