हरियाणा
4 घंटे पहले
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भारत में आधुनिक विनिर्माण और तकनीकी कौशल को नए शिखर पर ले जाने के लिए युवाओं को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित केंद्रीय टूल रूम एवं प्रशिक्षण केंद्र (CTTC) इस दिशा में एक मिसाल बनकर उभरा है। हाल ही में PIB भुवनेश्वर द्वारा आयोजित एक विशेष एक्सपोजर टूर के दौरान चंडीगढ़ से आए पत्रकारों के एक दल ने इस संस्थान का दौरा किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य यह देखना था कि देश के युवाओं को किस प्रकार भविष्य की उन्नत तकनीकों से जोड़ा जा रहा है और उन्हें उद्योग की वास्तविक जरूरतों के लिए तैयार किया जा रहा है।
अत्याधुनिक तकनीकों से लैस प्रयोगशालाएं और व्यावहारिक ज्ञान
पत्रकारों ने अपने दौरे के दौरान CTTC परिसर में मौजूद कई आधुनिक प्रयोगशालाओं और कार्यशालाओं का बारीक विश्लेषण किया। संस्थान में युवाओं को केवल किताबी ज्ञान नहीं दिया जा रहा है, बल्कि उन्हें सीधे मशीनों पर काम करने का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जा रहा है। पत्रकारों ने यहां निम्नलिखित क्षेत्रों से संबंधित अत्याधुनिक तकनीकों और प्रशिक्षण प्रणालियों का जायजा लिया:
- 3D मेटल और प्लास्टिक प्रिंटिंग: भविष्य की इस तकनीक के माध्यम से जटिल पुर्जों का निर्माण बेहद आसानी और सटीकता से किया जा रहा है।
- इंडस्ट्री 4.0 और इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स: औद्योगिक स्वचालन (ऑटोमेशन) और रोबोट के संचालन की बारीकियों को समझाने के लिए छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और PLC: आधुनिक उद्योगों में मशीनों के आपस में संपर्क और नियंत्रण की तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
- हाई-प्रिसीजन CNC मिलिंग और टर्निंग मशीनें: कंप्यूटर नियंत्रित इन मशीनों पर छात्र खुद कोडिंग और डिजाइनिंग का काम करते हैं।
संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे छात्रों ने पत्रकारों के सामने CNC मशीनिंग, डिजाइनिंग और ऑटोमेशन की जटिल प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक संचालित करके अपनी कार्यकुशलता और दक्षता का जीवंत प्रदर्शन किया।
अंतरिक्ष और एयरोस्पेस क्षेत्र में CTTC का योगदान
इस संस्थान की सबसे बड़ी खासियत इसकी तकनीकी क्षमता है, जिसके तहत यहां एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए अत्यंत सटीक और संवेदनशील पुर्जों का निर्माण किया जाता है। CTTC की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, यह संस्थान ISRO की विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए एयरोस्पेस कंपोनेंट्स का निर्माण करता है। इसके अलावा, विमानन क्षेत्र जैसे कि तेजस विमान और अन्य रक्षा उपकरणों के निर्माण में भी इस उच्च-सटीकता वाली विनिर्माण प्रक्रिया का बहुत महत्व है। इससे यहां प्रशिक्षण ले रहे छात्रों को सीधे उन तकनीकों पर काम करने का दुर्लभ अवसर मिलता है, जिनका उपयोग देश की शीर्ष अंतरिक्ष और रक्षा प्रणालियों में होता है।
रोजगारपरक और दीर्घकालिक तकनीकी पाठ्यक्रम
CTTC की स्थापना मुख्य रूप से उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी प्रशिक्षण देने, टूल डिजाइन करने, उत्पादन बढ़ाने और नवीन डिजाइनिंग तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। यहाँ पर संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। वर्तमान में संस्थान द्वारा चलाए जा रहे प्रमुख पाठ्यक्रमों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- डिप्लोमा इन टूल एंड डाई मेकिंग
- डिप्लोमा इन मेक्ट्रोनिक्स
- डिप्लोमा इन ऑटोमेशन एंड रोबोटिक्स (यह तीन वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम है जो छात्रों को औद्योगिक स्वचालन की दुनिया के लिए तैयार करता है)
इनके अतिरिक्त संस्थान में CAD/CAM, CNC प्रोग्रामिंग, टूल डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और मशीन मेंटेनेंस जैसे लघु और मध्यम अवधि के कई अन्य आधुनिक तकनीकी पाठ्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं।
नेतृत्व और मीडिया की सहभागिता
दौरे के दौरान संस्थान के महाप्रबंधक प्रभारी डॉ. केएम राजन ने पत्रकारों को संस्थान की विभिन्न तकनीकी गतिविधियों, वर्तमान परियोजनाओं और प्रशिक्षण मॉडलों की विस्तृत जानकारी दी। वहीं, प्रशासन, लेखा एवं मानव संसाधन प्रमुख सुशांत कुमार राउत ने युवाओं तक इस उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण और सटीक इंजीनियरिंग के महत्व को पहुंचाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर PIB चंडीगढ़ के निदेशक प्रीतम सिंह, सहायक निदेशक पार्थ सारथी मलिक और धर्म सिंह भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस शैक्षणिक यात्रा के उद्देश्यों और इसके सामाजिक प्रभाव पर अपने विचार साझा किए।
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