राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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पाकिस्तान को मिला कड़ा जवाब
संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन के बाद भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने तीखा पलटवार किया है। भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने 'राइट टू रिप्लाई' यानी उत्तर देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान को आईना दिखाया। पेटल गहलोत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दिन में सुरक्षा की बातें करना और रात के अंधेरे में आतंकवाद को पनाह देना पाकिस्तान की पुरानी फितरत है, जो अब किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भारत ने साफ कर दिया है कि बार-बार झूठ बोलने से वह सच में तब्दील नहीं हो जाता।
ओसामा बिन लादेन और पाकिस्तान का सच
भारतीय राजनयिक ने अपने संबोधन में 9/11 आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में पूरी दुनिया ने 9/11 के भयावह हमलों की 25वीं बरसी मनाई है। यह याद दिलाना जरूरी है कि उस हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में ही अपनी सेना की एक प्रमुख अकादमी के करीब रह रहा था। हैरान करने वाली बात यह है कि आज पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने उसी सेना की तारीफों के पुल बांधे, जिसके संरक्षण में दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी छिपा बैठा था। पेटल गहलोत ने तंज कसते हुए कहा कि पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति ऐसी है कि वहां की जनता भी अपनी सरकार को 'फॉर्म 47 सरकार' कहकर पुकारती है, जिसका मतलब है कि वहां सत्ता का वास्तविक केंद्र कहीं और है।
सेना द्वारा नियंत्रित व्यवस्था
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के शासन तंत्र पर निशाना साधते हुए कहा कि वहां के लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों पर उपदेश सुनना काफी अजीब लगता है। हकीकत यह है कि पाकिस्तान की राजधानी आज अपने ही लोगों से बचने के लिए सुरक्षा घेरे में कैद है। वहां की सरकार 'सेना की, सेना द्वारा और सेना के लिए' काम करती है। चेहरों के बदलने से व्यवस्था नहीं बदलती क्योंकि असली निर्णय लेने वाले चेहरे वही रहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन और वहां के असली शासक को दी गई आजीवन कानूनी छूट से यह स्पष्ट हो जाता है कि वहां लोकतंत्र का ढांचा कैसा है।
धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यकों की स्थिति
संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान द्वारा दिए गए बयानों को ढोंग बताते हुए भारतीय राजनयिक ने कहा कि जो लोग खुद कट्टरता के लंबे इतिहास के साथ जुड़े हैं, वे आज मानवाधिकार की बात कर रहे हैं। पाकिस्तान में ईशनिंदा कानूनों का जिस तरह दुरुपयोग होता है, वह किसी से छिपा नहीं है। वहां अल्पसंख्यकों के साथ जो व्यवहार किया जाता है, उससे पूरी दुनिया वाकिफ है। मीठी और दिखावटी बातों से वैश्विक समुदाय को गुमराह करने की पाकिस्तान की कोशिशें अब नाकाम हो चुकी हैं।
जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा
कश्मीर के मुद्दे पर भारत ने अपना रुख एक बार फिर दोहराया। पेटल गहलोत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और यह स्थिति हमेशा बनी रहेगी। उन्होंने पाकिस्तान को चुनौती दी कि यदि उन्हें कश्मीर की इतनी ही चिंता है, तो उन्हें पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की बात करनी चाहिए। उन्होंने रावलकोट के लोगों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की जनता लंबे समय से हिंसा, हत्याओं और अपने बुनियादी अधिकारों से वंचित है। पाकिस्तान को पहले अपने कब्जे वाले क्षेत्रों में हो रहे अत्याचारों पर ध्यान देना चाहिए।
आतंकवाद पर भारत की चेतावनी
भारतीय राजनयिक ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस पूरे विवाद की जड़ में पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली नीति है। भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि आतंकवादियों के लिए न कोई सुरक्षित स्थान है और न ही कहीं छिपने की जगह बाकी बची है। पेटल गहलोत ने कहा कि अपनी रक्षा करना भारत का मौलिक अधिकार है और देश अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जाने के लिए तैयार है। यदि पाकिस्तान अपनी आतंकी गतिविधियों को बंद नहीं करता है, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने अंत में कहा कि आतंकवाद, छल और दोहरा रवैया न तो पाकिस्तान के अपने हित में है और न ही वैश्विक शांति के लिए उचित है। भारत का स्पष्ट मानना है कि पाकिस्तान को अपनी नीतियों में आमूलचूल परिवर्तन करना होगा, अन्यथा उसे दुनिया की नजरों में और अधिक अपमान का सामना करना पड़ेगा।
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