एक एकड़ में मछली-मुर्गी-बकरी से लेकर बीसियों सब्जियां — झारखंड का इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल, 90% सब्सिडी भी झारखंड 2 घंटे पहले 5
झारखंड पशुपालन विभाग ने एक एकड़ जमीन वाले किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल तैयार किया है, जिसमें पशुपालन, मछली पालन और सब्जियों की खेती एक साथ की जा सकती है। सोलर पंप, ड्रिप इरिगेशन और बीज पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है।

झारखंड का इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल क्या है?

झारखंड पशुपालन विभाग ने एक अभिनव कृषि मॉडल विकसित किया है, जिसे इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल के नाम से जाना जा रहा है। इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कम से कम एक एकड़ जमीन रखने वाला कोई भी किसान इसे अपना सकता है। एक ही खेत में बकरी, मुर्गी, बत्तख और मछली पालन के साथ-साथ बैंगन, टमाटर, आलू, मशरूम और अमरूद जैसी तमाम फसलें उगाई जा सकती हैं।

कृषि पदाधिकारी ओपी गुप्ता के अनुसार इंटीग्रेटेड फार्मिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान किसी एक उत्पाद पर निर्भर नहीं रहते। उनके पास हमेशा विकल्पों की भरमार रहती है और बाजार में जो भी मांग हो, उसे पूरा करने में वे सक्षम होते हैं।

खेत में अलग-अलग क्यारियों की व्यवस्था

इस मॉडल में पूरे खेत को अलग-अलग क्यारियों और ब्लॉकों में विभाजित किया जाता है। एक क्यारी में टमाटर, दूसरी में बैंगन, तीसरी में भिंडी और चौथी में आलू लगाया जाता है। इस तरह एक ही स्थान पर विभिन्न सब्जियों की खेती संभव हो जाती है। बाजार में जिस सब्जी की जितनी मांग हो, किसान उसी के अनुसार आपूर्ति कर सकते हैं।

फलदार पेड़ों से मेड़ों की हरियाली

खेत की मेड़ों और किनारों पर आम, अमरूद, कटहल और पपीते के पेड़ लगाए जा सकते हैं। इन फलों की बाजार में अच्छी मांग रहती है और ये पेड़ किसानों को अतिरिक्त आमदनी का जरिया देते हैं। इस तरह खाली पड़ी मेड़ों का भी सदुपयोग हो जाता है।

सोलर पंप और ड्रिप इरिगेशन से सिंचाई की टेंशन खत्म

इस मॉडल में खेत में सोलर पंप लगाया जाएगा, जिससे बिजली बिल की समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। सोलर पैनल से उत्पन्न बिजली से ही सिंचाई के लिए मोटर चलाई जाएगी। इसके साथ ड्रिप इरिगेशन प्रणाली भी लगाई जाएगी, जिससे पानी की खपत काफी कम होगी। पशुओं से निकलने वाले अपशिष्ट को खेत में जैविक खाद के रूप में उपयोग किया जाएगा, जिससे रासायनिक खाद पर निर्भरता घटेगी।

90 प्रतिशत सब्सिडी — मात्र 6,000 रुपये में ड्रिप इरिगेशन

इस पूरे मॉडल की सबसे आकर्षक बात सरकारी सब्सिडी है। सोलर पैनल, ड्रिप इरिगेशन मशीन और बीज जैसी सभी जरूरी चीजों पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है। इस सब्सिडी के बाद ड्रिप इरिगेशन की मशीन किसानों को मात्र 6,000 रुपये में उपलब्ध हो जाती है।

निशुल्क चार दिवसीय प्रशिक्षण उपलब्ध

इंटीग्रेटेड फार्मिंग अपनाने के इच्छुक किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय में जाकर निशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। यह प्रशिक्षण चार दिनों का होता है, जिसमें किसानों को इंटीग्रेटेड फार्मिंग की पूरी जानकारी दी जाती है। प्रशिक्षण के दौरान ही सोलर पैनल, ड्रिप इरिगेशन और बीज पर 90 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ उठाने की प्रक्रिया भी बताई जाती है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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