खास खबर: राम मंदिर के दान की गिनती करने वालों ने ही लगाई सेंध! ट्रस्ट कैंप कार्यालय प्रभारी ने बताई पूरी हकीकत उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 39
राम मंदिर ट्रस्ट के कैंप कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने लोकल18 से बातचीत में बताया कि दान पात्रों से निकाली गई राशि की गिनती के दौरान ही कथित हेराफेरी हुई और इसमें बाहरी नहीं, बल्कि गणना करने वाले कुछ कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं।

अयोध्या में राम मंदिर के दान पात्र से जुड़े कथित धन हेराफेरी मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के कैंप कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने अहम जानकारी साझा की है। उनका कहना है कि इस प्रकरण से ट्रस्ट की छवि पर असर पड़ रहा था, इसी वजह से ट्रस्ट ने खुद ही सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया था। इसके बाद सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया, जो पूरे मामले की पड़ताल कर रहा है।

गिनती करने वाले कर्मचारियों पर ही शक

लोकल18 से बातचीत में प्रकाश गुप्ता ने साफ किया कि कथित गड़बड़ी या चोरी का संबंध किसी बाहरी व्यक्ति से नहीं है, बल्कि इसे दान पात्र की गणना करने वाले कुछ कर्मचारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों पर संदेह जताया जा रहा है, वे वही कर्मचारी थे जो दान पात्र से निकली राशि की गिनती का काम संभालते थे। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हेराफेरी इसी प्रक्रिया के दौरान हुई।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ये कर्मचारी किसी बैंक के स्थायी कर्मचारी नहीं थे, बल्कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत काम कर रहे थे।

पहले ट्रस्ट परिसर में ही होती थी गिनती

प्रकाश गुप्ता ने बताया कि शुरुआत में मंदिर में आने वाले दान और दान पात्र से प्राप्त धनराशि की गिनती ट्रस्ट परिसर में ही की जाती थी। दान पात्र भर जाने पर उसे खोला जाता था और नोटों को उनके मूल्य के आधार पर अलग-अलग करके गिना जाता था। इसके बाद बैंक के कर्मचारी आकर राशि अपने साथ ले जाते थे।

उन्होंने बताया कि समय के साथ बैंक ने मंदिर परिसर में अपना अलग काउंटर बना लिया था। इसके बाद अधिकांश धनराशि सीधे बैंक कर्मचारियों को सौंपी जाने लगी और ट्रस्ट की भूमिका सीमित रह गई। गुप्ता ने कहा कि ट्रस्ट को इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि कुछ लोग इतनी सफाई से धन की हेराफेरी कर सकते हैं।

पहले दो जगहों पर चलते थे दान काउंटर

महिपाल सिंह की ओर से लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रकाश गुप्ता ने कहा कि महिपाल सिंह पहले ट्रस्ट के सहयोगी के तौर पर काम करते थे और बाद में उन्हें दान राशि की गणना से जुड़े कार्यों में लगाया गया था। उन्होंने बताया कि शुरुआत में ट्रस्ट कार्यालय और मंदिर परिसर—दोनों जगहों पर दान काउंटर चलते थे, जहां श्रद्धालुओं को रसीद देकर दान स्वीकार किया जाता था।

गुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा विवाद दान काउंटर पर मिली धनराशि से नहीं, बल्कि दान पात्रों की गिनती की प्रक्रिया से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में रखे बड़े दान पात्रों से धन निकाला जाता था, नोटों की गड्डियां बनाई जाती थीं और फिर उनकी गणना की जाती थी। यह पूरा काम संबंधित कर्मचारी करते थे, जबकि ट्रस्ट की ओर से निगरानी के लिए एक प्रतिनिधि वहां मौजूद रहता था।

ट्रस्ट कर रहा जांच एजेंसियों का सहयोग

प्रकाश गुप्ता ने भरोसा जताया कि ट्रस्ट जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रहा है। उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने आने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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