Nirjala Ekadashi 2026: 25 जून को रखा जाएगा निर्जला एकादशी व्रत, जानिए पूजा विधि और जरूरी नियम धर्म एक महीने पहले 35
इस वर्ष निर्जला एकादशी व्रत 25 जून 2026 को रखा जाएगा। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है और मान्यता है कि यह एक व्रत साल की सभी एकादशियों का फल देता है।

Nirjala Ekadashi 2026 Vrat Vidhi: निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति इस एकादशी का व्रत करता है, उसे साल भर की समस्त एकादशियों का पुण्य एक ही बार में मिल जाता है। इस व्रत में सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक न तो अन्न ग्रहण किया जाता है और न ही जल। इस दिन श्रद्धालु बिना जल के रहकर भगवान विष्णु की उपासना करते हैं। कहा जाता है कि यह व्रत रखने से दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। पांडव पुत्र भीमसेन ने भी यह व्रत किया था। इस साल निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026 को रखा जाएगा। आइए जानते हैं इस व्रत की पूजा विधि और इससे जुड़े नियम।

निर्जला एकादशी 2026 तिथि और मुहूर्त

निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026 को रखा जाएगा। एकादशी तिथि का आरंभ 24 जून की शाम 06:12 बजे से होगा और इसका समापन 25 जून की रात 08:09 बजे होगा। इस व्रत के पारण का समय 26 जून की सुबह 05:25 से 08:13 बजे तक रहेगा। वहीं, पारण तिथि पर द्वादशी समाप्त होने का समय रात 10:22 बजे है।

निर्जला एकादशी व्रत विधि

  • निर्जला एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठें, पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक निर्जल रहकर व्रत करने का संकल्प लें।
  • अब विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
  • भगवान की प्रतिमा के पास कलश की स्थापना करें और उसमें जल, सुपारी, अक्षत, एक सिक्का तथा आम के कुछ पत्ते डालें।
  • इसके पश्चात भगवान विष्णु को पीले फूल, धूप, दीप, चंदन, अक्षत, तुलसी के पत्ते, फल और मिठाई आदि अर्पित करें।
  • भगवान को पंचामृत का भोग भी लगाएं।
  • इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
  • पूरे दिन निर्जल व्रत रखें, लेकिन यदि स्वास्थ्य कारणों से बिना जल के रहना संभव न हो तो जल ग्रहण किया जा सकता है।
  • इस दिन व्रत करने वाले व्यक्ति को अनाज, जल से भरा घड़ा, छाता, वस्त्र और फल आदि किसी जरूरतमंद को दान अवश्य करना चाहिए।
  • रात भर जागरण करें और अगले दिन सुबह पूजा करने के बाद ही अपना व्रत खोलें।
  • व्रत का पारण करने से पहले ब्राह्मण या गरीबों को भोजन अवश्य कराएं।
मीरा शर्मा पाबना की धर्म एवं संस्कृति लेखिका हैं, जो त्योहार, धर्म, ज्योतिष और परंपराओं पर लिखती हैं। व्रत-त्योहारों के महत्व, पूजा विधि और आस्था से जुड़े विषयों को वे श्रद्धा और जानकारी के साथ पेश करती हैं। वाराणसी से उनका जुड़ाव उनके लेखन में झलकता है।

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