मध्य प्रदेश में एचआईवी का खतरनाक रुझान: जांच घटी, फिर भी दोगुने हुए मामले, मां से बच्चों तक फैल रहा संक्रमण मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
इंदौर में एचआईवी जांच की संख्या 1.47 लाख से घटकर करीब 85 हजार रह गई, मगर पॉजिटिव मामले 492 से बढ़कर 615 हो गए और संक्रमण दर दोगुनी होकर 0.72 प्रतिशत पर पहुंच गई। साथ ही राज्य में संक्रमित गर्भवती महिलाओं की संख्या बढ़ रही है और कई नवजात मां से संक्रमित मिल रहे हैं।

मध्य प्रदेश में एचआईवी संक्रमण को लेकर सामने आए ताजा आंकड़ों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब संक्रमण दर लगातार ऊपर जा रही है, तो उसी दौरान जांचों की संख्या में गिरावट क्यों दर्ज हो रही है। इंदौर जैसे बड़े शहर में वर्ष 2022 में जहां करीब 1.47 लाख लोगों की एचआईवी जांच हुई थी, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर लगभग 85 हजार रह गया है। इसके बावजूद पॉजिटिव मरीजों की संख्या 492 से बढ़कर 615 तक पहुंच चुकी है और संक्रमण दर 0.33 प्रतिशत से बढ़कर 0.72 प्रतिशत हो गई है।

यानी कम जांच के बावजूद ज्यादा संक्रमित मरीज सामने आ रहे हैं। यह स्थिति इस ओर इशारा करती है कि जमीनी स्तर पर असली तस्वीर आंकड़ों से कहीं अधिक गंभीर हो सकती है। यह समस्या केवल इंदौर तक सीमित नहीं है। राज्य एड्स नियंत्रण समिति के आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2020-21 में जहां 3771 संक्रमित गर्भवती महिलाएं दर्ज की गई थीं, वहीं 2025-26 में यह संख्या 7167 तक पहुंच गई। इसी अवधि में 200 से अधिक नवजात बच्चों में मां से संक्रमण पहुंचने के मामले सामने आए हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि समय पर जांच, नियमित दवा और चिकित्सकीय निगरानी से ऐसे अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है। इसके बावजूद बढ़ते आंकड़े स्वास्थ्य जागरूकता और उपचार व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

इंदौर में क्यों बढ़ रही है संक्रमण दर

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में एचआईवी पॉजिटिविटी रेट करीब दोगुना हो गया है। वर्ष 2022 में यह दर 0.33 प्रतिशत थी, जो 2023 में 0.67 प्रतिशत, 2024 में 0.70 प्रतिशत और 2025 में 0.72 प्रतिशत तक पहुंच गई। जानकारों का मानना है कि असुरक्षित यौन संबंध और नशे के दौरान संक्रमित सुइयों का इस्तेमाल संक्रमण फैलने के बड़े कारणों में शामिल हैं।

कम जांच से छिप रही असली स्थिति

एचआईवी पर काबू पाने का सबसे कारगर तरीका व्यापक स्क्रीनिंग और समय रहते पहचान है। लेकिन इंदौर में जांचों की संख्या लगातार घट रही है, जिसके चलते कई संक्रमित लोग समय पर सामने नहीं आ पा रहे। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि कम स्क्रीनिंग के कारण संक्रमण की वास्तविक स्थिति का आकलन करना मुश्किल होता जा रहा है।

गर्भवती महिलाओं और नवजातों पर मंडराता खतरा

राज्य में संक्रमित गर्भवती महिलाओं की संख्या बढ़ना सबसे चिंताजनक पहलू माना जा रहा है। वर्ष 2025-26 में 743 एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी दर्ज की गई। कई मामलों में गर्भावस्था के दौरान या तो समय पर जांच नहीं हुई या इलाज बीच में ही छूट गया, जिससे मां से बच्चे तक संक्रमण पहुंचने का जोखिम और बढ़ गया।

आखिर क्यों नहीं रुक रहा संक्रमण

विशेषज्ञों के अनुसार कई वजहें संक्रमण नियंत्रण की राह में रोड़ा बन रही हैं। इनमें समय पर जांच न कराना, एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी बीच में छोड़ देना, संक्रमण की जानकारी छिपाना, नवजात को जरूरी दवा न देना और संक्रमित मां द्वारा चिकित्सकीय सलाह के बिना स्तनपान कराना शामिल हैं।

केस स्टडी ने बढ़ाई चिंता

एक मामले में महिला की पहली गर्भावस्था के दौरान एचआईवी जांच ही नहीं हुई और दूसरी गर्भावस्था में संक्रमण का पता चला। इसके बाद पति और पहला बच्चा भी संक्रमित पाए गए। एक अन्य मामले में मां ने उपचार पूरा नहीं किया और नवजात को निर्धारित दवा भी नहीं दी गई, जिसके चलते बाद में बच्चा एचआईवी पॉजिटिव पाया गया।

जांच और निगरानी पर उठी आवाज

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी यह मुद्दा उठाते हुए सरकार से विशेष कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच और दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एचआईवी को सिर्फ चिकित्सा से नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता के जरिए भी नियंत्रित किया जा सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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