वजन बढ़ने से घुटनों पर बढ़ता है अतिरिक्त दबाव, ऑस्टियोआर्थराइटिस से बचाव के लिए डॉक्टर ने बताए खास उपाय स्वास्थ्य 3 घंटे पहले 7
बढ़ता हुआ शरीर का वजन सीधे तौर पर आपके घुटनों की सेहत को प्रभावित करता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि वजन में मामूली कमी भी जोड़ों के दर्द को कम करने और चलने-फिरने की क्षमता में सुधार करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

शरीर का बढ़ता भार और घुटनों की जटिल समस्याएं

हमारे घुटने शरीर के पूरे वजन को संतुलित करने के साथ ही रोजमर्रा के जीवन में चलने, बैठने और खड़े होने जैसी क्रियाओं के लिए मुख्य आधार हैं। जब किसी व्यक्ति का वजन सामान्य से अधिक हो जाता है, तो घुटनों के जोड़ों पर पड़ने वाला यांत्रिक दबाव भी बढ़ जाता है। विशेष रूप से सीढ़ियां चढ़ते समय, कुर्सी से उठते समय या चलते हुए घुटनों को शरीर का अतिरिक्त भार उठाना पड़ता है। पीएसआरआई अस्पताल में निदेशक और वरिष्ठ सलाहकार डॉ. गौरव प्रकाश भारद्वाज के अनुसार, यदि घुटनों पर लंबे समय तक ऐसा भारी दबाव बना रहे, तो जोड़ों में दर्द, जकड़न और आवाजाही में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जिन मरीजों को पहले से ही ऑस्टियोआर्थराइटिस की शिकायत है, उनके लिए बढ़ा हुआ वजन समस्या को और भी अधिक गंभीर बना देता है।

क्या वजन घटाने से आर्थराइटिस को रोका जा सकता है?

निश्चित रूप से, वजन को नियंत्रित करने से घुटनों पर पड़ने वाले दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है और दर्द को प्रबंधित करने में मदद मिलती है। हालांकि, यह स्पष्ट होना चाहिए कि वजन घटाना ऑस्टियोआर्थराइटिस का पूर्ण उपचार नहीं है। इस बीमारी की उत्पत्ति के पीछे केवल वजन ही नहीं, बल्कि उम्र, अनुवांशिकी, जोड़ों की बनावट और पहले लगी हुई चोटें जैसे कारक भी जिम्मेदार होते हैं। इसलिए, वजन कम करना लक्षणों में राहत तो दे सकता है लेकिन हर मामले में इसे पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं दी जा सकती।

कितना वजन कम करना साबित होता है असरदार?

यदि कोई व्यक्ति अधिक वजन और घुटनों के दर्द या ऑस्टियोआर्थराइटिस से जूझ रहा है, तो शोध और चिकित्सीय अनुभव बताते हैं कि शरीर के कुल वजन का 5 से 10 प्रतिशत तक हिस्सा कम करना काफी फायदेमंद हो सकता है। यह मामूली बदलाव भी घुटनों के जोड़ों पर पड़ रहे तनाव को कम करता है, दर्द से राहत दिलाता है और व्यक्ति की सक्रियता को बेहतर बनाता है। वजन घटाने का लक्ष्य निर्धारित करते समय संबंधित व्यक्ति की आयु, उनका वर्तमान स्वास्थ्य और वजन को ध्यान में रखना अनिवार्य है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि बहुत तेजी से वजन कम करने की होड़ में न पड़ें और न ही बिना डॉक्टरी परामर्श के किसी कठोर डाइट का पालन करें। इसके बजाय, धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से वजन घटाना अधिक टिकाऊ और सुरक्षित होता है।

घुटनों की सुरक्षा के लिए जीवनशैली में बदलाव

अपने घुटनों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए संतुलित खान-पान और शारीरिक रूप से सक्रिय रहना बेहद जरूरी है। जिन लोगों को घुटनों में तकलीफ महसूस होती है, उन्हें फिजियोथेरेपिस्ट या डॉक्टर की देखरेख में कम दबाव वाले व्यायाम जैसे तैराकी या स्थिर साइकिल चलाने का अभ्यास करना चाहिए। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने से बचें। यदि घुटनों में लगातार सूजन, जकड़न, तेज दर्द या चलने में दिक्कत आ रही है, तो इसे केवल बढ़े हुए वजन का परिणाम मानकर नजरअंदाज न करें, बल्कि विशेषज्ञ से तुरंत जांच कराएं।

डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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