ओडिशा के कंधमाल में जन्मा दो सिर वाला दुर्लभ बच्चा, एम्स भुवनेश्वर के डॉक्टर कर रहे हैं गहन निगरानी राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 6
ओडिशा के कंधमाल जिले में एक दुर्लभ शारीरिक स्थिति के साथ पैदा हुए नवजात को एम्स भुवनेश्वर में भर्ती कराया गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम उसके स्वास्थ्य पर निरंतर नजर बनाए हुए है।

कंधमाल में हुआ दुर्लभ बच्चे का जन्म

ओडिशा के कंधमाल जिले में एक बेहद असामान्य और दुर्लभ मामला सामने आया है, जहाँ एक नवजात शिशु ने एक शरीर और दो सिर के साथ जन्म लिया है। इस शिशु का वजन 2.6 किलोग्राम है और यह बच्चा वर्तमान में जीवित है तथा सांस ले रहा है। इस अनोखे मामले ने चिकित्सा जगत में सभी को हैरान कर दिया है और यह डॉक्टरों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस समय शिशु को एम्स भुवनेश्वर में भर्ती कराया गया है, जहाँ एक विशेष चिकित्सकीय टीम उसकी स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी रख रही है।

परिजनों और जन्म की जानकारी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह बच्चा तुमुडीबांधा ब्लॉक के तिदिपाड़र गांव के निवासी 22 वर्षीय त्रिलोचन माझी और 21 वर्षीय रूनी की पहली संतान है। पिता एक दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करते हैं। बच्चे का जन्म 10 अक्टूबर को एक सीजेरियन ऑपरेशन के जरिए हुआ था। शुरुआती तौर पर बच्चे को ब्रह्मपुर स्थित महाराजा कृष्ण चंद्र गजपति मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट यानी SNCU में रखा गया था, लेकिन उसकी जटिल शारीरिक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए एम्स भुवनेश्वर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया।

चिकित्सकीय दृष्टि से क्या है यह स्थिति

सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. मानस रंजन दास के अनुसार, चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इस दुर्लभ अवस्था को डाइसेफेलिक पैरापैगस कहा जाता है। इसमें नवजात के दो सिर और गर्दन एक ही धड़ से जुड़े होते हैं, जबकि हाथ-पैर की एक ही जोड़ी और एक ही जननांग मौजूद होते हैं। नवजात के जननांग पुरुष स्वरूप के हैं। बच्चे का जन्म गर्भावस्था के 32 सप्ताह में ही हो गया था, जिसे समय से पहले का जन्म माना जाता है।

मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ी चुनौती

डॉक्टरों का मानना है कि इस तरह के पैरापैगस ट्विन्स का जन्म अत्यंत दुर्लभ होता है। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग हर तीन लाख बच्चों में से केवल एक मामला ही ऐसा देखने को मिलता है। चूंकि इस स्थिति में शरीर के अंग साझा होते हैं, इसलिए बच्चे को बचाए रखना और भविष्य में उपचार की दिशा तय करना मेडिकल टीम के लिए काफी जटिल कार्य है।

अगली प्रक्रिया पर डॉक्टरों की नजर

फिलहाल, एम्स भुवनेश्वर में नियुक्त विशेष डॉक्टरों की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि बच्चे को किस प्रकार की विशेष देखभाल, सर्जरी या उपचार की आवश्यकता है। बच्चे की मां को भी स्वास्थ्य संबंधी विशेष देखभाल के लिए अस्पताल में रखा गया है। अस्पताल प्रशासन और चिकित्सा विशेषज्ञ इस मामले को लेकर अत्यंत सतर्क हैं और हर छोटी गतिविधि का रिकॉर्ड रखा जा रहा है। पूरी दुनिया की नजरें अब एम्स के विशेषज्ञों पर टिकी हैं कि वे इस दुर्लभ मेडिकल केस को किस प्रकार संभालते हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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