सालों सीधा चले, अब आजमाएं उल्टा चलना: रिवर्स वॉकिंग के ये फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान जीवनशैली एक घंटा पहले 3
पीछे की ओर चलना यानी रिवर्स वॉकिंग एक अनोखी फिटनेस एक्टिविटी है, जो कैलोरी घटाने, मांसपेशियों को मजबूत बनाने और शरीर का संतुलन सुधारने में मदद कर सकती है। हालांकि इसे हमेशा समतल और सुरक्षित जगह पर ही करना चाहिए।

सेहतमंद और चुस्त-दुरुस्त बने रहने के लिए हर किसी को नियमित रूप से टहलना चाहिए। पैदल चलना सबसे सरल कसरत है और इससे शरीर को कमाल के लाभ मिलते हैं। अगर आप हर दिन 30 मिनट वॉक करते हैं, तो कई गंभीर बीमारियों का जोखिम घट जाता है। इन दिनों फिटनेस की दुनिया में रिवर्स वॉकिंग यानी पीछे की ओर चलने का चलन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

क्या है रिवर्स वॉकिंग

फिटनेस विशेषज्ञों के अनुसार रिवर्स वॉकिंग एक ऐसी गतिविधि है, जो शरीर को बिल्कुल अलग तरीके से चुनौती देती है। इसमें व्यक्ति धीरे-धीरे पीछे की ओर कदम बढ़ाता है, जिससे सामान्य वॉक की तुलना में अधिक फायदे मिलते हैं। अमेरिका के क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, पीछे की ओर चलते समय पैरों, जांघों और पिंडलियों की मांसपेशियों पर एक अलग किस्म का दबाव पड़ता है। यही वजह है कि इसे मांसपेशियों की सक्रियता बढ़ाने वाली कसरत के रूप में देखा जाता है।

संतुलन और तालमेल में सुधार

कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि उल्टी दिशा में चलने से शरीर के संतुलन और नियंत्रण में बेहतरी आ सकती है। पीछे की ओर चलने के लिए दिमाग और शरीर दोनों को अधिक एकाग्र होना पड़ता है, जिससे बैलेंस और कोऑर्डिनेशन बेहतर हो सकता है। कई फिजिकल थेरेपी कार्यक्रमों में भी संतुलन सुधारने के लिए रिवर्स वॉकिंग को शामिल किया जाता है। यह खासतौर पर उन लोगों के लिए लाभकारी है, जो अपनी चाल और शारीरिक नियंत्रण को बेहतर बनाना चाहते हैं।

कैलोरी बर्न में मददगार

कुछ फिटनेस जानकारों का मानना है कि रिवर्स वॉकिंग के दौरान शरीर को सामान्य वॉकिंग की तुलना में ज्यादा ऊर्जा खर्च करनी पड़ सकती है। इसका अर्थ है कि यह कैलोरी घटाने में सहायक हो सकती है। हालांकि वजन कम करने के लिए केवल रिवर्स वॉकिंग के भरोसे रहने के बजाय संतुलित खानपान और नियमित व्यायाम भी उतने ही जरूरी हैं।

घुटनों के लिए कैसी है

माना जाता है कि रिवर्स वॉकिंग के दौरान घुटनों के आसपास की कुछ मांसपेशियां अलग ढंग से सक्रिय होती हैं। इससे कुछ लोगों को घुटनों के कामकाज में फायदा मिल सकता है। लेकिन अगर किसी को पहले से घुटनों या जोड़ों से जुड़ी कोई परेशानी है, तो ऐसा व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

बरतें ये सावधानियां

रिवर्स वॉकिंग हमेशा सुरक्षित और समतल जगह पर ही करनी चाहिए। शुरुआत में धीरे-धीरे और कम दूरी से अभ्यास करें। चलते वक्त इस बात का खास ध्यान रखें कि पीछे का रास्ता साफ हो और आसपास कोई रुकावट न हो। अगर संतुलन बनाने में दिक्कत महसूस हो, तो किसी साथी की मदद लें। सही तरीके से की गई रिवर्स वॉकिंग आपकी फिटनेस दिनचर्या में एक दिलचस्प और उपयोगी बदलाव ला सकती है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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