हेल्थ टिप्स: हार्ट अटैक के इन शुरुआती संकेतों को न करें अनदेखा, बिना देरी तुरंत कराएं इलाज जीवनशैली 17 घंटे पहले 5
बदलती जीवनशैली और बढ़ते मानसिक तनाव के चलते अब 17-18 वर्ष के युवा भी हार्ट अटैक की चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सीने में दर्द जैसे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना घातक साबित हो सकता है।

कभी हृदयाघात यानी हार्ट अटैक को सिर्फ बढ़ती उम्र की बीमारी समझा जाता था, लेकिन बदलते रहन-सहन और लगातार बढ़ते मानसिक दबाव ने इस सोच को पूरी तरह पलट दिया है। हालत यह है कि आज 17-18 वर्ष के युवा भी इस गंभीर बीमारी का शिकार बन रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव, गलत खानपान, धूम्रपान और शारीरिक सक्रियता की कमी हृदय रोगों की बड़ी वजह बन चुकी है। चिकित्सकों ने आगाह किया है कि सीने में दर्द जैसे शुरुआती लक्षणों को हल्के में लेने के बजाय समय रहते जांच और इलाज कराना चाहिए।

तनाव बना सबसे बड़ा कारण

आयुष हेल्थ केयर के निदेशक एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ए.के. सिंह बताते हैं कि पहले अत्यधिक वसा वाले भोजन और बढ़ती उम्र को हार्ट अटैक की प्रमुख वजह माना जाता था, मगर मौजूदा दौर में सबसे बड़ा कारण मानसिक तनाव बन गया है। आज का व्यक्ति अपने काम को लेकर इतना दबाव में रहता है कि इसका सीधा असर उसके दिल पर पड़ता है। लगातार तनाव में रहने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे अवसाद, उच्च रक्तचाप और दूसरी गंभीर बीमारियों की ओर बढ़ने लगता है, जो आगे चलकर हृदय रोगों को जन्म देती हैं।

कैसे आता है हार्ट अटैक

डॉ. सिंह के अनुसार हार्ट अटैक उस स्थिति में होता है, जब हृदय की मांसपेशियों तक रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित हो जाता है। रक्त प्रवाह रुकने या घटने पर हृदय की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं और यही हालत हृदयाघात का रूप ले लेती है। यही वजह है कि लोगों को इसके कारणों और शुरुआती लक्षणों के प्रति सजग रहना बेहद जरूरी है।

नियमित व्यायाम को बनाएं दिनचर्या का हिस्सा

उनके मुताबिक हार्ट अटैक की मुख्य वजहों में मानसिक तनाव, शराब का सेवन, अत्यधिक वसायुक्त भोजन, धूम्रपान और तंबाकू का इस्तेमाल शामिल हैं। इसके साथ ही शारीरिक गतिविधियों की कमी और नियमित व्यायाम न करना भी हृदय रोगों की बड़ी जड़ बनता जा रहा है। डॉ. सिंह सलाह देते हैं कि स्वस्थ जीवन के लिए नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।

खानपान की गलत आदतें पहुंचाती हैं नुकसान

खानपान को लेकर डॉ. सिंह कहते हैं कि आजकल ज्यादातर लोग समय पर भोजन नहीं कर पाते। अक्सर सुबह नाश्ता करने के बाद दोपहर का खाना छूट जाता है और फिर रात में जरूरत से ज्यादा भोजन कर सीधे सो जाते हैं। यह आदत शरीर के लिए बेहद हानिकारक है। उनका कहना है कि भोजन के तुरंत बाद सोने से पाचन क्रिया प्रभावित होती है और अतिरिक्त कैलोरी शरीर में जमा होने लगती है।

देर रात भारी भोजन से बढ़ता है मोटापा

डॉ. सिंह के अनुसार रात में देर से खाना और भोजन के तुरंत बाद बिस्तर पर चले जाना फैटी लीवर तथा मोटापे की शुरुआत की बड़ी वजह है। जब शरीर अतिरिक्त कैलोरी का इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो वह वसा के रूप में जमा होने लगती है। धीरे-धीरे यही वसा लीवर और शरीर के दूसरे हिस्सों में इकट्ठा होकर मोटापा और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने का काम करती है।

कोलेस्ट्रॉल और ब्लॉकेज का खतरा

वे बताते हैं कि बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल रक्त वाहिकाओं में प्लाक यानी वसा की परत जमा करने लगता है। इससे धमनियों का लचीलापन घटता है और रक्त प्रवाह में रुकावट आती है। समय के साथ यही प्लाक ब्लॉकेज में बदल जाता है, जिससे हृदय की मांसपेशियों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता और हार्ट अटैक की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

सीने के दर्द को गैस न समझें

शुरुआती लक्षणों पर रोशनी डालते हुए डॉ. सिंह कहते हैं कि कई बार लोग सीने में होने वाले दर्द को गैस या अपच मानकर अनदेखा कर देते हैं और यही सबसे बड़ी भूल साबित होती है। अगर किसी व्यक्ति को सीने में दर्द के साथ हाथों में दर्द, शरीर में ठंडापन, अत्यधिक पसीना, बेचैनी या सांस लेने में तकलीफ महसूस हो, तो इसे गैस समझने की गलती कतई नहीं करनी चाहिए।

तुरंत कराएं ईसीजी जांच

डॉ. सिंह के अनुसार ऐसे लक्षण दिखते ही बिना देरी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। हार्ट अटैक के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद अहम होते हैं, जिन्हें चिकित्सा विज्ञान में "गोल्डन पीरियड" कहा जाता है। यदि मरीज इसी अवधि में अस्पताल पहुंच जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए किसी भी तरह के सीने के दर्द को हल्के में न लें और जरूरत पड़ने पर तुरंत ईसीजी जैसी प्राथमिक जांच जरूर कराएं।

आपस में जुड़ी हैं ये बीमारियां

डॉ. सिंह बताते हैं कि मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और तनाव एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। लगातार तनाव में रहने से व्यक्ति का ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। उच्च रक्तचाप और तनाव मधुमेह को बढ़ावा देते हैं और ये सब मिलकर हृदय रोगों का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं। इसी वजह से इन बीमारियों को समय रहते नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।

रात में लें हल्का आहार

बचाव के उपाय बताते हुए वे कहते हैं कि लोगों को सुबह का नाश्ता और दोपहर का भोजन संतुलित तथा पौष्टिक रखना चाहिए। रात का भोजन हल्का होना चाहिए और देर रात भारी खाना खाने से बचना चाहिए। रात में फल, सब्जियों का जूस, दाल का सूप या अन्य हल्के तरल पदार्थ लेना ज्यादा फायदेमंद रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि रात में काम करने वालों को खास सावधानी बरतनी चाहिए।

तनाव मुक्त जीवनशैली अपनाएं

देर रात काम करने वालों को हल्का भोजन करना चाहिए और नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए, ताकि कोलेस्ट्रॉल और दूसरे जोखिम कारकों पर नियंत्रण बना रहे। डॉ. ए.के. सिंह ने लोगों से अपील की कि वे तनाव मुक्त जीवन जीने की कोशिश करें, नियमित व्यायाम करें, तंबाकू और शराब से दूर रहें और संतुलित आहार अपनाएं। उनका कहना है कि हार्ट अटैक अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गया है, इसलिए युवाओं को भी अपनी सेहत के प्रति सतर्क रहना चाहिए। जागरूकता और समय पर इलाज ही हृदयाघात से बचाव का सबसे कारगर तरीका है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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