निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में की आत्महत्या, मरने से पहले बयां किया था अपना दर्द
उत्तराखंड
एक घंटा पहले
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हरिद्वार में मिली सुरेंद्र कोली की लाश
नोएडा के चर्चित निठारी कांड के मुख्य आरोपी 50 वर्षीय सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली है। कोली का शव एक चाय की टपरी के अंदर फंदे से लटका हुआ पाया गया। यह वही दुकान थी जिसे उसने अपनी आजीविका चलाने के लिए लगभग 10 दिन पहले ही शुरू किया था। वह इसी चाय की दुकान में रहकर अपना गुजारा कर रहा था। घटना की सूचना शुक्रवार दोपहर उस समय मिली जब कुछ राहगीरों ने उसे टपरी के अंदर लटका हुआ देखा और तुरंत स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी दी।
मरने से पहले बयां की थी अपनी लाचारी
जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि अपनी मौत से कुछ घंटे पहले सुरेंद्र कोली ने अपने एक पुराने परिचित और पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत को फोन किया था। उस फोन कॉल के दौरान कोली ने अपनी पीड़ा और लाचारी स्पष्ट रूप से जाहिर की थी। उसने बताया कि चाय की टपरी का मालिक उसे पैसों और दुकान के किराए को लेकर लगातार प्रताड़ित कर रहा है। कोली की बातों से साफ था कि वह आर्थिक तंगी और मानसिक दबाव से बुरी तरह गुजर रहा था। हालांकि, जब तक नारायण सिंह रावत कुछ समझ पाते या उसकी मदद के लिए आगे आते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अगली सुबह वह अपनी दुकान में ही मृत पाया गया।
पुलिस और फोरेंसिक टीम की कार्रवाई
हरिद्वार सिटी के सर्कल ऑफिसर शिशुपाल सिंह नेगी ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि पुलिस की टीम को सूचना मिलते ही मौके पर भेजा गया था। पुलिस ने शव को फंदे से नीचे उतारा और आगे की कानूनी कार्यवाही शुरू की। घटनास्थल पर सबूत जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया था। पुलिस के शुरुआती आकलन के अनुसार, यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि छानबीन के दौरान मृतक के कपड़ों या टपरी के अंदर से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जो मामले को और अधिक रहस्यमयी बनाता है।
सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद का संघर्ष
सुरेंद्र कोली का जीवन पिछले कुछ समय से बेहद संघर्षपूर्ण रहा था। पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने उसे आखिरी मामले में बरी कर दिया था, जिसके बाद वह अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने की कोशिश में था। जेल से बाहर आने के बाद वह आजीविका कमाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहा था। हरिद्वार में एक छोटी सी चाय की दुकान खोलना उसी संघर्ष का हिस्सा था, लेकिन आर्थिक मजबूरियों और मकान मालिक के दबाव ने उसे इस खौफनाक कदम तक पहुंचा दिया। फिलहाल पुलिस मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उसकी मौत के पीछे की परिस्थितियां वास्तव में क्या थीं।
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