मलमास के अंतिम पक्ष की एकादशी क्यों है इतनी खास, इन मंत्रों से करें भगवान विष्णु की उपासना और बदलें भाग्य उत्तराखंड 3 महीने पहले 47
मलमास के अंतिम पक्ष में पड़ने वाली एकादशी का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु और सूर्य देव की आराधना से जीवन में सुख-समृद्धि आने और सोई हुई किस्मत के जागने की मान्यता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार एक संवत में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना करने से अनेक चमत्कारी फल प्राप्त होते हैं। जब संवत में मलमास का आगमन होता है, तब दो एकादशियों की वृद्धि हो जाती है।

मलमास में भगवान विष्णु और सूर्य देव की आराधना का खास महत्व बताया गया है। मलमास तीन संवत के बाद आता है और इसके नकारात्मक प्रभाव को समाप्त करने के लिए विष्णु तथा सूर्य देव की उपासना विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। यही कारण है कि इस अवधि में पड़ने वाली एकादशी को अत्यंत शुभ माना गया है।

मलमास में एकादशी का विशेष महत्व

इस विषय में विस्तार से जानकारी देते हुए पंडित सुरेंद्र शास्त्री ने बताया कि सामान्य संवत में 24 एकादशी होती हैं, परंतु जिस संवत में मलमास का आगमन होता है, उसमें दो एकादशी अधिक हो जाती हैं। मलमास यानी अधिक मास या पुरुषोत्तम मास में पूजा-पाठ और व्रत आदि का खास महत्व रहता है।

उनके अनुसार इस मास की अवधि में भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा, अर्चना तथा आराधना करने से अत्यधिक लाभ मिलता है। इस समय ज्येष्ठ अधिक मास का अंतिम पक्ष चल रहा है, जो 15 जून तक रहेगा। 11 जून को अधिक मास के अंतिम पक्ष की एकादशी का आगमन होगा।

पूजा की विधि

संवत 2083 के मलमास की आखिरी एकादशी 11 जून, गुरुवार को पड़ेगी। ज्येष्ठ मलमास की इस एकादशी पर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करना चाहिए और गंगा के विशेष मंत्रों का जाप करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए।

इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए और पवित्र मन व पवित्र हृदय से भगवान विष्णु के शक्तिशाली मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का 108 बार जाप करते हुए विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए।

मान्यता है कि इस व्रत के दौरान मन में सात्विकता बनाए रखते हुए भगवान विष्णु की आराधना करने से मलमास यानी पुरुषोत्तम मास का नकारात्मक प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो जाता है और जीवन में सुख-समृद्धि एवं खुशहाली बनी रहती है। संयोगवश इस बार मलमास के अंतिम पक्ष की एकादशी गुरुवार को पड़ रही है, जिसके कारण इसका फल लाखों गुना अधिक माना जा रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप