गोंडा: मुजेहना के नंदलाल ने भिंडी की खेती से बदली तकदीर, वैज्ञानिक तकनीक से कमा रहे लाखों उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 22
गोंडा के मुजेहना ब्लॉक के गांव उज्जैनीकल के युवा किसान नंदलाल जायसवाल ने पारंपरिक खेती छोड़कर भिंडी उगाना शुरू किया और अब इससे सालाना लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड मुजेहना की ग्राम सभा उज्जैनीकल के एक युवा किसान ने पारंपरिक खेती का रास्ता छोड़कर सब्जियों की खेती को अपना लिया है। अपनी कड़ी मेहनत और नई सोच के दम पर उसने इलाके में अलग पहचान बना ली है। फिलहाल वह अपने खेतों में भिंडी की पैदावार ले रहा है और इससे सालाना लाखों रुपये कमा रहा है।

पारंपरिक फसलों से सब्जी की खेती तक का सफर

युवा किसान नंदलाल जायसवाल बताते हैं कि शुरुआत में वह गेहूं और धान जैसी परंपरागत फसलें उगाया करते थे, लेकिन इनमें लागत के मुकाबले मुनाफा बेहद कम रह जाता था। यही वजह रही कि उन्होंने सब्जी की खेती की ओर रुख किया। कई तरह की सब्जियां उगाने के बाद आखिरकार उन्होंने भिंडी की खेती को चुना, क्योंकि बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है।

बाजार में रहती है खूब मांग

नंदलाल जायसवाल का कहना है कि भिंडी एक ऐसी सब्जी है जो लगभग हर घर में पसंद की जाती है। लोग इसे हरी सब्जी के रूप में बड़े चाव से खाते हैं, जिसके चलते इसकी बिक्री आसानी से हो जाती है और किसानों को भी अच्छा दाम मिलता है। मांग लगातार बनी रहने के कारण उन्हें अपनी उपज बेचने में कोई दिक्कत नहीं होती।

उन्होंने बताया कि भिंडी की खेती में सही समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और कीटों से बचाव पर खास ध्यान देना पड़ता है। अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करें तो कम समय में अच्छी पैदावार पाई जा सकती है। फसल तैयार होने के बाद कई दिनों तक लगातार तुड़ाई चलती रहती है, जिससे किसानों को नियमित आमदनी होती रहती है।

वर्मी कम्पोस्ट के इस्तेमाल से बढ़ी मांग

नंदलाल जायसवाल के अनुसार, पारंपरिक फसलों की तुलना में भिंडी की खेती से उन्हें कई गुना अधिक लाभ मिल रहा है। उनकी उपज स्थानीय मंडियों के साथ-साथ आसपास के बाजारों में भी भेजी जाती है।

वह बताते हैं कि अपनी भिंडी की आपूर्ति वे अगल-बगल के बाजारों में करते हैं, इसके अलावा आसपास के लोग सीधे उनके खेत से ही भिंडी खरीद लेते हैं। उनका कहना है कि वे अपने खेत में गोबर से बनी वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग करते हैं और रासायनिक खाद का इस्तेमाल न के बराबर करते हैं। यही कारण है कि बाजार में उनकी फसल की मांग हमेशा बनी रहती है और दूसरे किसानों की तुलना में उनकी भिंडी का दाम भी अधिक मिलता है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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