वर्मी कंपोस्ट बनाने वाले किसान रहें अलर्ट, बारिश के मौसम में इन गलतियों से मर सकते हैं आपके केंचुए मध्य प्रदेश एक महीने पहले 64
मानसून के दौरान वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नमी और जलभराव के प्रबंधन में थोड़ी सी भी चूक केंचुओं की जान ले सकती है और आपकी पूरी मेहनत बर्बाद कर सकती है।

मानसून के दौरान वर्मी कंपोस्ट की विशेष देखभाल

आजकल के दौर में किसान खेती की लागत को कम करने और मिट्टी की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए वर्मी कंपोस्ट यानी केंचुआ खाद की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। यह जैविक खाद न केवल मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारती है, बल्कि फसलों की पैदावार में भी बेहतरीन परिणाम देती है। हालांकि, जैसे ही मानसून का आगमन होता है, वर्मी कंपोस्ट बेड की देखभाल के तरीके बदल जाते हैं। यदि इस दौरान छोटी सी भी लापरवाही बरती जाए, तो इसका खामियाजा केंचुओं की मौत के रूप में भुगतना पड़ सकता है।

क्यों घातक है बरसात का पानी

सीधी जिले के पापरा गांव के निवासी रमाशंकर कुशवाहा के मुताबिक, केंचुए बेहद संवेदनशील जीव होते हैं। उन्हें जीवित रहने और बढ़ने के लिए एक निश्चित मात्रा में नमी की आवश्यकता होती है, लेकिन बरसात का अधिक पानी उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। जब बेड में बारिश का पानी भर जाता है, तो वहां जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप, बेड के अंदर ऑक्सीजन का संचार रुक जाता है। ऑक्सीजन की इस कमी के कारण केंचुओं का दम घुटने लगता है और वे बड़ी संख्या में मरने लगते हैं। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो पूरी खाद इकाई बर्बाद हो सकती है।

जलभराव से बचाव के उपाय

रमाशंकर कुशवाहा सलाह देते हैं कि बरसात में खाद बनाने की प्रक्रिया को सुरक्षित रखने के लिए बेड का चुनाव हमेशा ऊंची जमीन पर करें। यह सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण है कि बारिश का पानी बेड के चारों ओर जमा न हो। यदि आपका वर्मी कंपोस्ट बेड खुले स्थान पर स्थित है, तो उसे ऊपर से ढंकना अनिवार्य है। इसके लिए आप तिरपाल, टिन शेड या किसी भी वाटरप्रूफ कवर का उपयोग कर सकते हैं। यह कवर सीधे बारिश की बूंदों को खाद के भीतर जाने से रोकता है, जिससे बेड का तापमान और नमी नियंत्रित रहती है। इसके अतिरिक्त, बेड की नियमित निगरानी करना आवश्यक है। यदि कहीं भी पानी का ठहराव नजर आए, तो उसे तुरंत बाहर निकालने का उचित इंतजाम करें। बेड के आसपास हवा का आवागमन बना रहना चाहिए ताकि केंचुओं को ऑक्सीजन मिलती रहे।

क्या डालें और क्या न डालें

खाद की गुणवत्ता बनाए रखने और केंचुओं को स्वस्थ रखने के लिए सामग्री का चुनाव बेहद सावधानी से करना चाहिए। वर्मी कंपोस्ट में केवल अच्छी तरह सड़ा हुआ गोबर, सूखी पत्तियां और जैविक अपशिष्ट का ही प्रयोग करें। कुछ किसान जल्दबाजी में ताजा गोबर डाल देते हैं, जो केंचुओं के लिए हानिकारक होता है। इसके अलावा, भूलकर भी प्लास्टिक का कचरा, रासायनिक अवशेष या अन्य घातक पदार्थ बेड में न डालें। ये चीजें न केवल केंचुओं के विकास को रोकती हैं, बल्कि बनने वाली खाद की गुणवत्ता को भी पूरी तरह खत्म कर देती हैं।

खेती की लागत में कमी

परवेश शुक्ला के अनुसार, यदि किसान बरसात के इन चुनौतीपूर्ण दिनों में भी थोड़ी सी सावधानी और सही तकनीक का पालन करें, तो केंचुए न केवल जीवित रहेंगे, बल्कि वे तेजी से खाद भी तैयार करेंगे। उच्च गुणवत्ता वाली यह जैविक खाद मिट्टी को उपजाऊ बनाती है और रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता को कम करती है। कुल मिलाकर, सही देखभाल के साथ बारिश के मौसम में भी वर्मी कंपोस्ट उत्पादन को एक लाभदायक व्यवसाय के रूप में जारी रखा जा सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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