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एक घंटा पहले
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मेरठ में नई जिम्मेदारी और पारंपरिक अंदाज
मेरठ के नए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यभार संभालने वाले 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी बीबीजीटीएस मूर्ति इन दिनों चर्चा के केंद्र में हैं। उनका चर्चा में आने का मुख्य कारण केवल उनका पद नहीं, बल्कि उनका अनोखा अंदाज भी है। जब वे मेरठ पहुंचे, तो पारंपरिक भारतीय परिधान धोती-कुर्ते में सर्किट हाउस पहुंचे, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद उन्होंने पुलिस कार्यालय जाकर विधिवत अपनी वर्दी धारण की और कार्यभार संभाला। मेरठ के निवासियों और प्रशासनिक गलियारों में उनकी इस सादगी और भारतीय संस्कृति के प्रति लगाव की काफी प्रशंसा की जा रही है। उन्होंने 20 अगस्त 2026 को मेरठ एसएसपी का पदभार ग्रहण किया है।
तेलंगाना से उत्तर प्रदेश तक का सफर
बीबीजीटीएस मूर्ति का जन्म 12 फरवरी 1985 को आंध्र प्रदेश के तिरुपति में हुआ था। हालांकि, उनका पालन-पोषण और शिक्षा दीक्षा मुख्य रूप से हैदराबाद, तेलंगाना में हुई। उनके पिता बी ईश्वरैया हैं। मूर्ति ने अपनी अकादमिक शिक्षा कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक के साथ पूरी की, जिसके बाद उन्होंने मार्केटिंग में एमबीए की डिग्री भी हासिल की। एक तकनीकी और प्रबंधन पृष्ठभूमि होने के बावजूद, उनका झुकाव जनसेवा की ओर था। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को अपना लक्ष्य बनाया और 2015 में सफलता हासिल कर आईपीएस अधिकारी बने। उनकी आधिकारिक सेवा भर्ती की तिथि 28 दिसंबर 2015 दर्ज है और उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित किया गया था।
भाषा की चुनौती और हिंदी पर पकड़
एक गैर-हिंदी भाषी राज्य से आने वाले बीबीजीटीएस मूर्ति के लिए उत्तर प्रदेश में अपनी सेवा देना एक बड़ी चुनौती थी। तेलुगू उनकी मातृभाषा है और शुरुआत में उन्हें हिंदी का ज्ञान नहीं था। हालांकि, उन्होंने इस बाधा को अपनी कार्यकुशलता में बाधक नहीं बनने दिया। उन्होंने खुद को राज्य की जनता से जोड़ने के लिए मेहनत की और हिंदी सीखी। प्रारंभ में गूगल ट्रांसलेटर जैसे तकनीकी साधनों का सहारा लेने वाले मूर्ति ने निरंतर अभ्यास से हिंदी बोलना और लिखना सीखा। यह उनके उस जज्बे को दर्शाता है, जिसके तहत वे मानते हैं कि एक अधिकारी को जनता की सेवा के लिए स्थानीय परिवेश और भाषा को समझना अनिवार्य है।
माफियाओं पर कठोर प्रहार
कासगंज में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनाती के दौरान बीबीजीटीएस मूर्ति की छवि एक सख्त और निडर अधिकारी के रूप में स्थापित हुई। यहाँ उन्होंने अपराध जगत और माफियाओं के नेटवर्क को ध्वस्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। विशेष रूप से, कुख्यात अपराधी नफीस अहमद उर्फ कालिया की अवैध संपत्तियों पर की गई कार्रवाई ने उन्हें प्रदेश भर में चर्चा में ला दिया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उनके नेतृत्व में माफिया की 100 करोड़ 28 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की गई थी। इस कदम ने अपराधियों के हौसले पस्त कर दिए और जनता के बीच पुलिस के प्रति विश्वास को और मजबूत किया।
झांसी में अपराधों का खुलाशा
कासगंज के बाद उनकी तैनाती झांसी में हुई, जहाँ उन्होंने 22 अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 तक लगभग 16 महीने का लंबा कार्यकाल पूरा किया। इस दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था को लेकर कड़े फैसले लिए। उन्होंने न केवल अपहरण, हत्या और साइबर अपराधों की गुत्थियों को सुलझाया, बल्कि संगठित अपराध पर भी प्रहार किया। कटेरा क्षेत्र में साइबर अपराध से जुड़े 23 अपराधियों की गिरफ्तारी, कुएं में मिले शव के टुकड़े, और सीपरी बाजार में बक्से में शव जलाने जैसी सनसनीखेज वारदातों का खुलासा करना उनकी पुलिसिंग का उत्कृष्ट उदाहरण रहा। इसके अलावा, बीजेपी नेता आशीष उपाध्याय सहित 100 से अधिक आईपीएल सटोरियों को गिरफ्तार करना भी उनके महत्वपूर्ण कार्यों में गिना जाता है।
एनकाउंटर और अपराध नियंत्रण
बीबीजीटीएस मूर्ति के झांसी कार्यकाल के दौरान अपराधियों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई गई। उनके 16 महीने के कार्यकाल के दौरान झांसी पुलिस द्वारा 93 एनकाउंटर किए गए, जिनमें कुल 122 अपराधी घायल हुए। इन आंकड़ों से साफ है कि वे अपराध के खिलाफ किसी भी तरह की ढील देने के पक्ष में नहीं थे। झांसी की जनता ने उनके समय में एक सुरक्षित वातावरण का अनुभव किया। उन्होंने अपने सेवा रिकॉर्ड में कई सम्मान और प्रशंसा पत्र भी अर्जित किए हैं, जो उनकी कार्यक्षमता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
एक अधिकारी का जीवन दर्शन
बीबीजीटीएस मूर्ति का करियर ग्राफ केवल पदों के बदलाव की कहानी नहीं है, बल्कि यह सीखने, बदलाव को अपनाने और चुनौतियों का सामना करने की एक लंबी यात्रा है। गाजियाबाद में अपनी पहली पोस्टिंग से लेकर लखनऊ में इंटेलिजेंस एसपी, कानपुर देहात, कासगंज, झांसी और अब मेरठ तक, उनका हर पड़ाव उनकी परिपक्वता को दर्शाता है। वे एक ऐसे अधिकारी के रूप में उभरकर आए हैं, जो आधुनिक तकनीक और प्रबंधन के साथ-साथ पारंपरिक मूल्यों के संतुलन को बखूबी समझते हैं। मेरठ जैसे महत्वपूर्ण जिले में उनकी पोस्टिंग को प्रशासनिक रूप से एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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