व्यापार
एक घंटा पहले
5
विचारों
बिहार को मिलेगी नई कनेक्टिविटी
बिहार की सड़कों को आधुनिक बनाने के क्रम में एक बेहद महत्वपूर्ण सड़क परियोजना को स्वीकृति दे दी गई है। बक्सर से भागलपुर तक के सफर को आसान बनाने के लिए 336 किलोमीटर लंबे 6 लेन वाले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जाएगा। इस बड़े बदलाव के बाद बक्सर से भागलपुर जाने वाले यात्रियों का काफी समय बचेगा। वर्तमान में इन दो शहरों के बीच यात्रा करने में लगभग 10 से 12 घंटे का समय लग जाता है, लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद यह सफर महज 4 से 5 घंटे में पूरा हो सकेगा। यह न केवल आम यात्रियों के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि राज्य में व्यापारिक और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति प्रदान करेगा।
13 जिलों को एक सूत्र में पिरोएगा मार्ग
इस प्रस्तावित एक्सप्रेसवे का लाभ बिहार के 13 जिलों को मिलेगा। इस मार्ग से बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, नवादा, जमुई, बांका और भागलपुर जिले सीधे जुड़ जाएंगे। इस सड़क परियोजना की एक खास विशेषता यह है कि बक्सर में यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के साथ जुड़ जाएगा। इससे दिल्ली और लखनऊ से आने वाले वाहनों के लिए बिहार से होते हुए पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों तक पहुंचना बेहद सुगम हो जाएगा।
समय की बचत और रफ्तार का लाभ
एक्सप्रेसवे के डिजाइन को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि यह एक्सेस कंट्रोल्ड होगा, जिसका अर्थ है कि बीच रास्ते में अनावश्यक ट्रैफिक सिग्नल या चौराहे नहीं होंगे। वाहनों की आवाजाही बिना किसी बाधा के जारी रहेगी। प्रवेश और निकास की सुविधा केवल चिन्हित स्थानों पर ही दी जाएगी, जिससे गाड़ियां अपनी पूरी रफ्तार से चल सकेंगी और यात्रा का कुल समय काफी कम हो जाएगा।
नदियों पर बनेंगे पुल और बुनियादी ढांचा
इस परियोजना के रास्ते में कई प्रमुख नदियां भी आएंगी, जिनमें सोन, पुनपुन, फल्गु और किऊल शामिल हैं। इन नदियों पर बड़े पुलों का निर्माण किया जाएगा ताकि मार्ग में कहीं कोई रुकावट न रहे। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों और स्थानीय सड़कों को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए फ्लाईओवर, अंडरपास और इंटरचेंज बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
औद्योगिक विकास और रोजगार की नई उम्मीदें
सरकार की मंशा इस एक्सप्रेसवे को केवल एक सड़क परियोजना तक सीमित रखने की नहीं है। इसके आसपास औद्योगिक हब, इकोनॉमिक जोन और लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित करने की भी योजना है। इससे उद्योगों को कच्चा माल लाने और तैयार उत्पादों को दूसरे राज्यों तक भेजने में सुगमता होगी। इस कॉरिडोर के विकसित होने से स्थानीय स्तर पर नए रोजगार के अवसर पैदा होने की भी प्रबल संभावनाएं हैं।
PPP मॉडल पर होगा निर्माण कार्य
इस मेगा प्रोजेक्ट को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के जरिए धरातल पर उतारा जाएगा। कैबिनेट से इस परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का काम शुरू हो गया है, जिसके बाद निर्माण कार्य की आगामी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।
Comments
0 comment