‘गुरुग्राम रोड बनाते समय यहां बसाया था, अब उजाड़ रहे हैं’, फरीदाबाद में बुलडोजर कार्रवाई पर 84 साल के अब्दुल का सवाल- अब कहां जाएं? हरियाणा 5 घंटे पहले 2
फरीदाबाद के एनआईटी-3 चौक और नेहरू कॉलोनी में नगर निगम की तोड़फोड़ से इलाके में दहशत है। मस्जिद और दुकानों के बाद घरों पर खतरे को देखते हुए दशकों से रह रहे लोग प्रशासन से पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।

फरीदाबाद के एनआईटी-3 चौक और नेहरू कॉलोनी में नगर निगम की तोड़फोड़ कार्रवाई ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। मस्जिद और दुकानों पर चली कार्रवाई के बाद अब लोगों के घरों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। दशकों से यहां रह रहे लोग बेघर हो जाने के डर के बीच प्रशासन से पुनर्वास की गुहार लगा रहे हैं और यह पूरा मामला अब बड़े विवाद का रूप लेता जा रहा है।

तड़के हुई कार्रवाई से मचा हड़कंप

नगर निगम ने शनिवार तड़के एनआईटी-3 चौक के पास अवैध रूप से बनी एक मस्जिद पर कार्रवाई की, जिसकी चर्चा फरीदाबाद ही नहीं बल्कि दिल्ली-एनसीआर तक गर्म हो गई। सुबह-सुबह हुई इस तोड़फोड़ के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसके बाद नेहरू कॉलोनी भी नगर निगम के निशाने पर आ गई, जहां लंबे समय से अवैध कब्जों और निर्माण को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

बताया जा रहा है कि नेहरू कॉलोनी में बड़ी संख्या में मकान सरकारी जमीन पर बने हुए हैं और अब वहां रहने वाले लोग इस कार्रवाई को लेकर दहशत में हैं। बातचीत में स्थानीय लोगों ने खुलकर अपनी पीड़ा रखी। किसी ने सालों की बसावट और परिवार की जड़ों का जिक्र किया तो किसी ने उजड़ने के डर और भविष्य की चिंता जताई। लोगों का कहना है कि वे कई वर्षों से यहां रह रहे हैं और अचानक हुई इस कार्रवाई से उनका सब कुछ खत्म हो जाने का डर सता रहा है।

‘50 साल से यहां हूं, दुकान भी गिरा दी’

स्थानीय निवासी संतरा बताती हैं कि वह करीब 50 साल से नेहरू कॉलोनी में रह रही हैं। उनकी मेडिकल की दुकान और परचून की दुकान, दोनों ही तोड़ दी गईं और अब घर तोड़ने की बात कही जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर वे जाएं तो जाएं कहां, जबकि उनके चार बेटे, बहुएं और नाती-पोते सब यहीं रहते हैं।

‘कीमत देने को तैयार, पर बेघर न करें’

84 साल के अब्दुल अजीज कहते हैं कि वह यहां 45 साल से रह रहे हैं। उनके मुताबिक पहले उन्हें 35-35 गज जमीन दी गई थी, जिस पर उन्होंने अपने घर बनाए। उनका कहना है कि गुरुग्राम रोड निकाले जाने के समय उन्हें यहां बसाया गया था और अब अचानक उन्हें उजाड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि रात करीब 3 बजे मस्जिद भी गिरा दी गई।

हम तो कीमत देने के लिए भी तैयार हैं, लेकिन हमें इस तरह बेघर न किया जाए।

इसी कॉलोनी में जन्मे पिनूस बताते हैं कि उनका जन्म यहीं हुआ है। उनके अनुसार यह कॉलोनी बहुत बड़ी है और पाली से लेकर नवादा तथा 17 नंबर चुंगी तक फैली हुई है। उनके पिता सब्जी बेचते हैं और वह खुद एल्यूमिनियम का काम करते हैं। उनका कहना है कि अब उनसे बस यही कहा जा रहा है कि जगह खाली कर दो, तोड़फोड़ होगी। वह भी यही सवाल करते हैं कि आखिर वे जाएं तो कहां जाएं।

उठ रहे हैं ये बड़े सवाल

  • क्या ये लोग सच में अवैध कब्जाधारी हैं? स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं कि वर्षों पहले उन्हें 35-35 गज के प्लॉट आवंटित किए गए थे।
  • इतनी बड़ी आबादी कैसे बसी? लोगों का कहना है कि करीब एक लाख लोगों तक की यह बस्ती धीरे-धीरे बढ़ती गई और किसी ने रोक-टोक नहीं की।
  • प्रशासन और नेताओं की भूमिका? स्थानीय लोग बिजली कनेक्शन और अन्य सुविधाओं को लेकर मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं।
  • क्या सभी घरों पर खतरा है? नोटिस और अनाउंसमेंट के बाद लोग आशंकित हैं कि कार्रवाई आगे भी जारी रह सकती है।

प्रशासनिक और सामाजिक विवाद की ओर इशारा

नेहरू कॉलोनी की मौजूदा स्थिति एक बड़े प्रशासनिक और सामाजिक विवाद की ओर इशारा कर रही है। एक ओर सरकार अवैध कब्जे हटाने की बात कह रही है, तो दूसरी ओर दशकों से बसे लोग अपने घर और जीवन बचाने की गुहार लगा रहे हैं। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और प्रभावित लोगों के पुनर्वास को लेकर कोई समाधान निकलता है या नहीं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!