मेरठ में फर्जी जनसेवा केंद्र का पर्दाफाश, लोगों की आईडी लेकर क्रेडिट कार्ड से उठाते थे लोन उत्तर प्रदेश 2 घंटे पहले 3
मेरठ साइबर सेल और लिसाड़ी गेट पुलिस ने फर्जी जनसेवा केंद्र चलाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो गरीब लोगों की आईडी हासिल कर फर्जी दस्तावेज और क्रेडिट कार्ड बनाकर ठगी करते थे।

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में साइबर सेल और थाना लिसाड़ी गेट पुलिस ने मिलकर एक फर्जी जनसेवा केंद्र का राजफाश किया है। लिसाड़ी गेट पुलिस ने मुखबिर की सूचना, सुरागरसी और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के आधार पर इस मामले में दो आरोपियों को दबोचा है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान निजामुद्दीन के बेटे अरकम और यासीन के बेटे निजामुद्दीन के रूप में हुई है, जो थाना कोतवाली क्षेत्र की अंसार कॉलोनी के रहने वाले हैं।

निशाने पर रहते थे गरीब परिवार

पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे खासतौर पर गरीब तबके के लोगों को अपना शिकार बनाते थे। मीठी-मीठी बातों में फंसाकर वे इन लोगों की आईडी हासिल कर लेते और फिर उसके आधार पर फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड समेत दूसरे दस्तावेज तैयार कर लेते थे। इतना ही नहीं, फर्जी रबर स्टैम्प और शील मोहर का इस्तेमाल कर वे इन नकली दस्तावेजों के सहारे बैंक खाते खुलवाते और उन्हीं नामों पर डेबिट तथा क्रेडिट कार्ड भी बनवा लेते थे।

दूसरों के नाम पर बनाते थे क्रेडिट कार्ड

पुलिस के मुताबिक आरोपी अपने मोबाइल फोन की मदद से इन खातों में instantmudra.in और swifemoney.in जैसी वेबसाइटों तथा अन्य ऑनलाइन पेमेंट ऐप्स के जरिए पैसों का लेन-देन करते थे और इस तरह दूसरे खातों में रकम भेजकर अवैध रूप से मुनाफा कमाते थे। पुलिस ने अरकम और निजामुद्दीन के पास से मोबाइल फोन, डेबिट और क्रेडिट कार्ड, बैंक पासबुक, चेक बुक, वोटर आईडी कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ब्लैंक हेल्थ कार्ड तथा रबर स्टैम्प और शील मोहर बरामद की है।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

थाना लिसाड़ी गेट में आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 319/318(4)/336(3)/338/340(2)/3(5), आईटी एक्ट की धारा 66 डी और आधार कार्ड एक्ट की धारा 36/37 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से इस ठगी के नेटवर्क को चला रहे थे। वे लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सेवाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनके दस्तावेज अपने पास जमा कर लेते थे।

फर्जीवाड़े की परतें खुलनी बाकी

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह से और कितने लोग जुड़े हुए हैं तथा दूसरों के दस्तावेजों के आधार पर अब तक कितने बैंक खाते खोले गए। इसके साथ ही बरामद मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराकर वित्तीय लेन-देन और संभावित पीड़ितों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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