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एक घंटा पहले
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परीक्षा केंद्रों पर सॉल्वर गैंग का जाल
देश की प्रमुख मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 के दौरान बिहार से सामने आए मामलों ने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है। लखीसराय जिले के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर प्रशासन ने तीन अलग-अलग स्थानों से नौ ऐसे लोगों को दबोचा, जो असली परीक्षार्थियों की जगह बैठकर परीक्षा दे रहे थे। इन केंद्रों में केंद्रीय विद्यालय, उच्च विद्यालय हसनपुर, केआरके उच्च विद्यालय और डायट लखीसराय शामिल थे। दस्तावेज़ों और बायोमीट्रिक मिलान में गड़बड़ी पाए जाने के बाद इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। अब तक इस मामले में कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें 5 मेडिकल छात्र भी शामिल हैं। एक आरोपी के पीएमसीएच से जुड़े होने की बात भी सामने आई है।
40 लाख रुपये तक की सौदेबाजी
जांच में पता चला है कि यह केवल नकल का मामला नहीं बल्कि एक संगठित माफिया गिरोह है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, परीक्षा पास कराने के एवज में अभ्यर्थियों से 40 लाख रुपये तक की डील की गई थी। पुलिस अब उन अभ्यर्थियों की पहचान करने में जुटी है जिन्होंने अपनी जगह सॉल्वर बिठाए थे। इस पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि इसमें और कितने पेशेवर लोग शामिल हैं।
बायोमीट्रिक एजेंसी की भूमिका संदेह के घेरे में
इस पूरे मामले में बायोमीट्रिक सत्यापन करने वाली निजी एजेंसी के 7 कर्मचारियों को भी हिरासत में लिया गया है। आरोप है कि कुछ फर्जी परीक्षार्थियों को बिना पूरी प्रक्रिया के ही परीक्षा केंद्र के भीतर प्रवेश दिया गया, जिससे एजेंसी के कर्मियों की मिलीभगत की आशंका बढ़ गई है। जिला अधिकारी शैलेंद्र कुमार और पुलिस अधीक्षक प्रेरणा कुमार के नेतृत्व में प्रशासन मामले की सख्त जांच कर रहा है।
मुजफ्फरपुर में टेलीग्राम के जरिए ठगी
लखीसराय के अलावा मुजफ्फरपुर में भी ठगों का एक बड़ा गिरोह पकड़ा गया है। ये लोग टेलीग्राम के जरिए छात्रों को नीट का असली पेपर दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये वसूलते थे। मुख्य आरोपी मनीष झा को गिरफ्तार कर पुलिस ने चार मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किया है। आरोपी सोशल मीडिया और क्यूआर कोड का इस्तेमाल करके छात्रों को ठगते थे। NTA ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पेपर लीक के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें फर्जी करार दिया है।
अंतरराज्यीय कनेक्शन की जांच
पुलिस को शक है कि इस रैकेट की जड़ें बिहार के बाहर भी फैली हुई हैं। पकड़े गए आरोपियों के बैंक खातों, फोन कॉल्स और डिजिटल लेनदेन की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह एक अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग का हिस्सा हो सकता है, जिसके तार कई राज्यों से जुड़े होने की संभावना है।
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