उत्तराखंड
एक घंटा पहले
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आंदोलन पर लगी फिलहाल रोक
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विद विजुअल डिसएबिलिटीज (NIEPVD) संस्थान में पिछले कुछ दिनों से दृष्टिबाधित छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। अब राहत की खबर यह है कि छात्रों और संस्थान के प्रशासन के बीच सफल बातचीत हुई है, जिसके परिणामस्वरूप छात्रों ने अपना चल रहा आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया है। प्रशासन ने छात्रों को यह भरोसा दिलाया है कि उनकी मांगों पर एक निश्चित समयसीमा के भीतर ठोस कार्रवाई की जाएगी।
क्यों शुरू हुआ था छात्रों का विरोध
संस्थान में पढ़ रहे दृष्टिबाधित छात्रों ने बुनियादी सुविधाओं और शैक्षणिक संसाधनों की कमी को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया था। छात्रों का तर्क था कि वर्तमान डिजिटल युग में उनकी पढ़ाई के लिए लैपटॉप अत्यंत आवश्यक उपकरण हैं, लेकिन इनका वितरण बेहद धीमी गति से हो रहा है। इसके अलावा, छात्रों ने अपनी शिकायतों में हॉस्टल की व्यवस्थाओं, भोजन की गुणवत्ता और छात्रवृत्ति से संबंधित समस्याओं का प्रमुखता से जिक्र किया था। छात्रों का यह प्रदर्शन पिछले कई दिनों से चल रहा था और प्रशासन के रवैये को लेकर भी उनके बीच काफी नाराजगी देखी जा रही थी।
वायरल वीडियो और विवाद
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हुआ। इस वीडियो में संस्थान के प्रिंसिपल दृष्टिबाधित छात्रों को अपनी समस्याएं समझाते हुए दिखाई दिए, लेकिन बातचीत के दौरान ही उन्होंने अचानक अपना आपा खो दिया। वीडियो में प्रिंसिपल छात्रों को समझाते हुए धमकाते और डांटते हुए नजर आए। इस व्यवहार के बाद से छात्रों में आक्रोश और अधिक बढ़ गया था और उन्होंने अपनी मांगों को मनवाने के लिए कड़ा रुख अपना लिया था।
प्रशासन का पक्ष और लैपटॉप वितरण में देरी का कारण
मामले की गंभीरता को देखते हुए NIEPVD के निदेशक डॉ. विनोद कुमार केन ने स्थिति को स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि लैपटॉप वितरण में देरी के पीछे संस्थान की कोई मंशा नहीं है, बल्कि यह सरकारी खरीद प्रक्रिया का एक हिस्सा है। डॉ. केन के अनुसार, सरकारी नियमों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है, जिसकी वजह से संसाधनों के आने में देरी हो रही है। उन्होंने छात्रों के साथ विस्तृत चर्चा की है और उन्हें सरकारी कामकाज की जटिलताओं के बारे में जानकारी दी है।
मांगों पर अमल के लिए अलग-अलग समयसीमा
संस्थान प्रशासन ने छात्रों की मांगों को दो श्रेणियों में बांटा है। डॉ. केन का कहना है कि संस्थान स्तर पर जो सुधार तुरंत किए जा सकते हैं, उन पर कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके लिए एक सप्ताह की समयसीमा तय की गई है। वहीं, कुछ मांगें ऐसी हैं जिनके लिए बड़े स्तर पर वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है। ऐसी मांगों को पूरा करने के लिए संबंधित मंत्रालय और एक्सपेंडिचर विभाग की अनुमति लेना जरूरी है। इसके बाद निर्माण कार्यों के लिए सीपीडब्ल्यूडी (CPWD) की प्रक्रिया का पालन करना होगा। ऐसी स्थिति में प्रशासन ने छात्रों को पारदर्शी रूप से यह समझाया है कि ऐसी जटिल मांगों के लिए तत्काल कोई निश्चित तारीख देना संभव नहीं होगा।
भविष्य पर छात्रों की नजर
भोजन की गुणवत्ता और अन्य दैनिक समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन ने छात्रों को विशेष आश्वासन दिया है। प्रशासन का कहना है कि हर एक मुद्दे को बारीकी से देखा जा रहा है और जहां भी सुधार की गुंजाइश है, वहां कदम उठाए जा रहे हैं। डॉ. विनोद कुमार केन के अनुसार, प्रशासन का पूरा प्रयास है कि इन मांगों को तय समय से पहले ही पूरा कर लिया जाए। फिलहाल स्थिति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है और छात्रों ने आंदोलन खत्म कर दिया है। हालांकि, अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन अपनी बातों पर कितना खरा उतरता है और छात्रसंघ की मांगें जमीनी स्तर पर कितनी जल्दी पूरी होती हैं।
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