शिक्षा
14 घंटे पहले
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नई दिल्ली: CBSE से जुड़े मामले में मोदी सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। इसी सिलसिले में बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया है। साथ ही, CBSE द्वारा ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सेवाओं की खरीद की पड़ताल के लिए एक जांच समिति भी बनाई गई है।
संसदीय समिति की बैठक में अधिकारियों से कड़ी पूछताछ
सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय से संबंधित संसद की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में आज सीबीएसई चेयरमैन और स्कूल एजुकेशन सेक्रेटरी से कड़े सवाल किए गए। समिति ने आज दोनों ही अधिकारियों को तलब किया था।
समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने सीबीएसई चेयरमैन से पूछा कि कॉपियां जांचने की नई व्यवस्था लागू करने में आखिर इतनी हड़बड़ी क्यों दिखाई गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या पूरी तैयारी के साथ इसे एक साल बाद लागू नहीं किया जा सकता था और इस तरह बच्चों का भविष्य दांव पर क्यों लगाया गया।
दिग्विजय सिंह ने सीबीएसई अध्यक्ष और सचिव से यह भी कहा कि वे कुछ सवाल लिखित रूप में देंगे और उन सभी का जवाब उन्हें चाहिए।
बैठक में बुलाया गया एक छात्र
समिति की इस बैठक में एक छात्र को भी आमंत्रित किया गया था, जिसने सीबीएसई चेयरमैन और सचिव के सामने ही कई अहम खामियों को उजागर किया। इस पर भाजपा सांसद भीम सिंह ने सीबीएसई अधिकारियों पर तंज कसते हुए कहा कि अगर उनसे यह काम नहीं हो पा रहा है, तो कम से कम इसी छात्र को अपना सहायक बना लें, क्योंकि यह उनका काम आसान कर देगा।
सपा सांसद ने उठाए तीखे सवाल
समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क ने भी सीबीएसई अध्यक्ष और सचिव के सामने सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि कॉपियां जांचने का ठेका ऐसी कंपनी को क्यों दिया गया, जिसे इसकी सही जानकारी तक नहीं थी। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि इस मामले में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई और शिक्षकों को पहले से उचित प्रशिक्षण क्यों नहीं दिया गया।
जियाउर रहमान बर्क ने कहा कि इस लापरवाही की जिम्मेदारी कंपनी के साथ-साथ सीबीएसई के अधिकारियों की भी बनती है और सभी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
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